अमेठी सिटी। हत्या कर साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव नहर में फेंकने के 13 साल पुराने मामले में एडीजे चतुर्थ सुल्तानपुर की अदालत ने दोषी पति-पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया गया है।
एडीजे चतुर्थ श्याम मोहन जायसवाल की अदालत ने दो दिन पहले दोषी ठहराए गए ओमप्रकाश और उनकी पत्नी राजकुमारी को शुक्रवार को सजा सुनाई। मामला मुंशीगंज के टेरी गांव का है। वादिनी राजकुमारी ने 27 मार्च 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक दिन पहले उनके पति अयोध्या प्रसाद घर से गौरीगंज के सेनीपुर स्थित बहन के घर जाने की बात कहकर निकले थे।
दिन में बेटे चंदन से फोन पर उनकी बात हुई, लेकिन शाम तक मोबाइल बंद हो गया। काफी तलाश के बाद अगले दिन अयोध्या प्रसाद का शव नहर के पास मिला। पुलिस की जांच में गोमती, उसके पुत्र राहुल वर्मा, ओमप्रकाश और राजकुमारी के नाम सामने आए। चारों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया। विचारण के दौरान अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर ओमप्रकाश और राजकुमारी को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना, जबकि गोमती और राहुल वर्मा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। शुक्रवार को सजा सुनाने के बाद अदालत ने दोषी दंपती को फिर से जेल भेजने का आदेश दिया।