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जल्द निजी भवन में संचालित होगा बीएसए दफ्तर

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गौरीगंज (अमेठी)। जिला सृजित होने के बाद से किराए के भवन में संचालित बीएसए कार्यालय को जल्द ही निजी भवन मिल जाएगा। 2011 में 73.30 लाख रुपये से निर्माण को मंजूरी मिलने व राशि अवमुक्त होने के सिर्फ भवन का ढांचा तैयार करने के बाद निर्माण कार्य बंद पड़ा था। कार्यदायी संस्था की ओर से तैयार पुनरीक्षित आगणन को शासन से मंजूरी मिल गई है। मंजूरी के बाद अवशेष धनराशि तीसरी किस्त के रूप में अवमुक्त हो चुकी है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के स्थायी कार्यालय का निर्माण स्वीकृति के बावजूद आज तक पूरा नहीं हो सका है। वित्तीय वर्ष 2011-12 में 73.30 लाख रुपये से भवन निर्माण को स्वीकृति देते हुए यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया था। कार्यदायी संस्था नामित करने के बाद 31 मार्च 2013 को पहली किस्त के रूप में 35 लाख रुपये तो 31 मार्च 2017 को दूसरी किस्त के रूप में 38.80 लाख रुपये अवमुक्त हुए। अवमुक्त धनराशि से मात्र भवन का ढांचा ही तैयार हो सका।
2017 में निर्माण बंद करने के बाद कार्यदायी संस्था ने एक करोड़ 91 लाख 10 हजार रुपये का पुनरीक्षण आगणन का प्रस्ताव भेजते हुए धन की डिमांड की। बेसिक शिक्षा विभाग की मांग पर मौजूदा डीएम राकेश कुमार मिश्र ने पत्राचार किया तो शासन ने पुनरीक्षित आगणन एक करोड़ 91 लाख 10 हजार को मंजूरी प्रदान करते हुए अवमुक्त हो चुकी 73 लाख 80 हजार रुपये कटौती कर एक करोड़ 17 लाख 80 की तीसरी किस्त अवमुक्त कर दी। धनराशि अवमुक्त होने के बाद विशेष सचिव आरबी सिंह ने शिक्षा निदेशक व बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र जारी कर धनराशि अवमुक्त होने की जानकारी दी है।
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होगा यह निर्माण कार्य
बीएस दफ्तार संचालित करने के लिए 94.45 लाख रुपये भवन निर्माण, 4.07 लाख रुपये से आंतरिक व 3.69 लाख रुपये से वाह्य भाग की फिनीशिंग, 6.2 लाख रुपये से वायरिंग व विद्युत उपकरण, 3.74 लाख रुपये से फायर बचाव प्रबंध, 22.15 लाख रुपये से वाह्य सौंदर्यीकरण व सुविधा, 11.19 लाख रुपये से गेट व बाउंड्रीवाल, 3.16 लाख रुपये से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, 7.71 लाख रुपये से पेयजल, प्रसाधन समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त शेष राशि से विद्युत संयोजन, जीएसटी, निर्माण व श्रमिक पंजीयन शुल्क जमा करने समेत अन्य कार्य पूरे किए जाएंगे।
तीन बार बदली पुनरीक्षित लागत
कार्यदायी संस्था ने पुनरीक्षित आगणन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्रशासन के माध्यम से तीन बार शासन को पत्र भेजा। पहली बार स्वीकृत लागत को 73.30 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ 30 लाख 18 हजार रुपये करने, दूसरी बार एक करोड़ 67 लाख रुपये करने व तीसरी बार एक करोड़ 77 लाख 42 हजार रुपये करने की मांग की गई। हालांकि शासन ने न तो पुनरीक्षित आगणन को स्वीकृति दी न ही राशि आवंटित की।
महज इतना काम हुआ
प्रभारी जिला समन्वयक निर्माण मनीष कुमार मिश्र ने बताया कि आवंटित 73.30 लाख रुपये भवन का ढांचा ही तैयार हुआ है। तैयार भवन के आधे भाग में फर्श भी नहीं बनी। साथ ही कार्यदायी संस्था ने बाउंड्रीवॉल, परिसर मेें मिट्टी भराई, वायरिंग, प्लंबरिंग व पेंटिंग का काम भी नहीं किया।
जर्जर भवन में चल रहा दफ्तर
बेसिक शिक्षा विभाग के पास अपना दफ्तर नहीं होने से परेशानी झेलनी पड़ती है। विभाग का काम-काज इन दिनों डीआईओएस कार्यालय के कुछ भाग में तो बीईओ गौरीगंज कार्यालय के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं लेखा कार्यालय भी शहर स्थित जूनियर हाईस्कूल के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। तीन स्थानों पर विभागीय कार्य होने से अफसर व कर्मियों के साथ शिक्षकों को परेशानी हो रही है। तीनों कार्यालय के बीच पर्याप्त दूरी होने से एक दिन मेें कार्य पूरा होना असंभव बना हुआ है।
प्रस्ताव को मिली स्वीकृति : बीएसए
बीएसए डॉ. अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि डीएम के प्रयास से रिवाइज इस्टीमेट की स्वीकृति मिलने तथा धनावंटन की पुष्टि की है। बताया कि धनराशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था को निर्माण शुरू करने को कहा गया है। कार्यालय भवन का निर्माण मानक के अनुसार समय सीमा में पूरा कराया जाएगा।
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