मॉडल प्राइमरी स्कूल जिरहा का भवन।
अमेठी सिटी। कक्षा में सभी बच्चे एक साथ पढ़ते हैं, लेकिन हर बच्चे की सीखने और समझने की क्षमता अलग-अलग होती है। कोई गणित के सवाल आसानी से हल कर लेता है तो किसी को जोड़-घटाना सीखने के लिए अधिक अभ्यास की जरूरत होती है। इसी तरह कुछ बच्चे भाषा पढ़ने में तो कुछ लिखने में पीछे रह जाते हैं। अब ऐसे बच्चों की शैक्षिक कमजोरियों को पहचानकर उन्हें अतिरिक्त पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए जिले के परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कैच-अप शिक्षण व्यवस्था लागू की जा रही है।
जिले में 1570 परिषदीय विद्यालय और 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 1.32 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। सभी बच्चों का शैक्षिक स्तर सुधारने और उन्हें विषयवार दक्ष बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत शिक्षकों को प्रत्येक बच्चे की विषयवार दक्षताओं का आकलन करना होगा। विभाग की ओर से प्रत्येक विद्यालय में कैच-अप रजिस्टर तैयार कराया जा रहा है। इसमें हर महीने की 30 तारीख तक बच्चों का आधारभूत आकलन कर उनकी प्रगति दर्ज की जाएगी।
आकलन के आधार पर विद्यार्थियों को तीन समूहों में बांटा जाएगा। ए समूह में निर्धारित लक्ष्य हासिल करने वाले, बी समूह में सहयोग से प्रगति करने वाले और सी समूह में अतिरिक्त शैक्षिक सहायता की जरूरत वाले बच्चे शामिल होंगे। बी और सी समूह के बच्चों के लिए हर शनिवार विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें भाषा और गणित का अतिरिक्त अभ्यास कराने के साथ पहले पढ़ाए गए पाठों की पुनरावृत्ति कराई जाएगी। शिक्षक शिक्षण सामग्री, सरल उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विषय समझाएंगे। जरूरत के अनुसार प्रत्येक बच्चे को व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
हर महीने परखी जाएगी बच्चों की प्रगति
बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि प्रधानाध्यापक हर महीने बच्चों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स विद्यालयों में कैच-अप रजिस्टर और शिक्षण गतिविधियों का अवलोकन करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी भी निरीक्षण के दौरान इसकी समीक्षा करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों की सीखने संबंधी कमियों को समय रहते दूर कर उनकी शैक्षिक दक्षता में सुधार करना है।