अमेठी सिटी। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे अब सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों के माध्यम से भी पर्यावरण की अहमियत को समझेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के निर्देशों के तहत सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की सीख देने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इसके तहत विद्यालयों में पोस्टर, पेंटिंग, नारा लेखन, रैली, सफाई अभियान, खाद निर्माण और किचन गार्डेन जैसी गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफ-एसई में पर्यावरण शिक्षा को 21वीं सदी के जरूरी कौशल में शामिल किया गया है। इसके माध्यम से बच्चों में नवाचार, अनुकूलन और नेतृत्व क्षमता को निखारने का काम किया जाएगा।
साथ ही पर्यावरण शिक्षा को भी व्यावहारिक बनाकर बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और समझ पैदा की जाएगी। इसके तहत जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक विविधता, वन्य जीवन और सतत विकास जैसे विषयों को सरल भाषा और रुचिकर तरीके से बच्चों को पढ़ाया जाएगा, ताकि बच्चे पर्यावरण की बेहतरी को लेकर संवेदनशील बन सके। इससे न केवल बच्चों में प्रकृति के प्रति समझ बढ़ेगी, बल्कि वे अपने परिवेश को स्वच्छ और टिकाऊ रखने की पहल भी खुद करने लगेंगे। बीएसए ने बताया कि इसके लिए शिक्षकों को भी विशेष तौर प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वह बच्चों को प्रेरित कर जागरूक बना सकें।