जगदीशपुर। तीन दिन से गोमती नदी में लापता राम मनोहर यादव (45) की तलाश कर रहे परिजनों की उम्मीद शुक्रवार को टूट गई। तीसरे दिन कोटवा गांव के पास नदी में झाड़ियों में उनका शव फंसा मिला। दो दिन तक कभी गोताखोर तो कभी नाव के सहारे नदी में तलाश करते रहे परिजनों को जब राम मनोहर का शव मिला तो परिवार में चीख-पुकार मच गई।
माहेमऊ गांव निवासी छोटेलाल ने बताया कि उनके भाई राम मनोहर बुधवार सुबह करीब 10 बजे बाइक से घर से निकले थे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। बुधवार को ही आमघाट पुल के पास उनका मोबाइल पड़ा मिला था। इसके बाद उनके नदी में कूदने की आशंका जताई गई। पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू कराई।
बृहस्पतिवार को भी परिजन निजी मछुआरों के साथ नाव लेकर नदी में दूर तक तलाश करते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। शुक्रवार को घटनास्थल से करीब चार किलोमीटर दूर कोटवा गांव के पास नदी में झाड़ियों में शव फंसा होने की जानकारी मिली। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। परिजनों ने राम मनोहर के रूप में पहचान की। ग्रामीणों में चर्चा है कि घर में पारिवारिक विवाद के बाद से वह लापता थे। हालांकि नदी में कूदने की बात की पुष्टि नहीं हुई है। सीओ अतुल सिंह ने बताया कि परिजनों ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है। मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
परिवार को थी सकुशल लौटने की उम्मीद
राम मनोहर के लापता होने के बाद से पत्नी रामलली, बेटे अमित और बेटी निशा उनकी राह देख रहे थे। परिवार के लोग लगातार नदी के किनारे पहुंचकर तलाश में जुटे थे। हर बार उम्मीद थी कि वह कहीं मिल जाएंगे और घर लौट आएंगे। शुक्रवार को शव मिलने की खबर ने परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ दीं। घर में मातम पसरा है।