- पांचों विधानसभाओं में हारी भाजपा, काम नहीं आई सपा विधायकों की खेमेबाजी
- गृहमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक ने किया था प्रचार
नंदलाल तिवारी
अमेठी सिटी। अमेठी की सियासत में मंगलवार को एक बड़ा बदलाव दिखा। केंद्रीय मंत्री स्मृति जूबिन इरानी की पराजय के साथ भाजपा के सियासी दिग्गज भी अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा सके। अमेठी संसदीय सीट की पांचों विधानसभाओं में भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी।
इसके पीछे कई कारण है, जिसने भाजपा के साधे हुए समीकरण को बिगाड़कर रख दिया। भले ही गृहमंत्री अमित शाह ने रोड शो किया हो लेकिन, वह मतदाताओं का मूड नहीं बदल सके। मुख्यमंत्री से लेकर अन्य नेताओं ने सभा की लेकिन, नतीजा ठीक उलट रहा।
अमेठी संसदीय सीट की पांच विधानसभाओं में से तीन पर भाजपा का कब्जा है। तिलोई से मयंकेश्वर शरण सिंह प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री है। जगदीशपुर से सुरेश पासी व सलोन से अशोक कोरी भाजपा विधायक हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में इन विधानसभाओं में जीत हासिल करने वाली भाजपा इस बार यहां से हार गई। गौरीगंज में सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह की पर्दे के पीछे से की गई सियासी मदद कोई काम नहीं आ सकी।
सबसे अजीब स्थिति अमेठी विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिली। स्मृति ईरानी के मंच पर सपा विधायक महराजी देवी (पत्नी गायत्री प्रसाद प्रजापति) के परिजनों की मौजूदगी का संदेश अच्छा नहीं गया। पिछले विधानसभा चुनाव में हारने के बाद भाजपा के डॉ. संजय सिंह इस चुनाव में तटस्थ बने रहे। उनकी सक्रियता कहीं नहीं दिखी। जिले में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष सहित चार निकायों में से तीन निकायों पर भाजपा का कब्जा है। इसके बाद भी सियासी परिणाम ने भाजपा के माथे पर शिकन ला दिया है।
अति आत्मविश्वास भी बना कारण
- यह बात अलग है कि स्मृति ईरानी बीते पांच साल क्षेत्र में रहीं। गांव-गांव जनसंवाद कार्यक्रम किया। भाजपाई मानकर चल रहे थे कि कोई टक्कर में नहीं है। स्मृति जूबिन ईरानी सीधा गांधी परिवार पर हमलावर होती रहीं। 15 साल के लापता सांसद का जिक्र करने के साथ राहुल गांधी पर इतना हमलावर रहीं कि वे अमेठी में न रहने के बावजूद चुनावी माहौल में बने रहे। अमेठी के मतदाताओं की जिज्ञासा राहुल गांधी की उम्मीदवारी को लेकर अंत तक बनी रही। राहुल के रायबरेली और किशोरीलाल के अमेठी से चुनाव लड़ने की घोषणा हुई तो अति आत्मविश्वास में लबरेज भाजपाइयों को लगा कि उन्होंने आधा मैदान मार लिया।
विवाद का भी पड़ा असर
- चाहे कांग्रेस कार्यालय के बाहर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ का मामला रहा हो या फिर पूर्व एमएलसी दीपक सिंह व राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष के खिलाफ दर्ज मुकदमे की बात हो। इन घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने सीधे भाजपा को घेरा।
इनसेट
नहीं लगा सकीं सेंध
- गठबंधन के कारण मुस्लिम-यादव मतदाता पहले से ही लामबंद थे। अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ी जातियों में भी भाजपा सेंधमारी नहीं कर सकी। यह बात अलग रही कि इसको लेकर काफी प्रयास हुए लेकिन, नतीजा सार्थक नहीं रहा।