जामों (अमेठी)। श्रीमद्भागवत कथा ही मनुष्य के कर्तव्यों का बोध कराती है। इसके सुनने से मनुष्य जीवन सुखमय हो जाता है। निष्काम भाव से ईश्वर को याद करने पर मनुष्य अपने जीवन को सुधार लेते है। ये बातें ग्राम पंचायत पूरब गौरा के धरमगदपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को अयोध्या धाम से आए प्रवाचक गरुणेश महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया मोह को अपने साथ लाते हैं। साधारण मनुष्य माया को ही शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि यह शरीर नश्वर है,। उन्होंने बताया कि बेटे को ध्रुव की तरह होना चाहिए। ध्रुव ने सुरुचि से अपमानित होने के बाद निश्चय कर लिया कि सिंहासन अथवा पिता की गोद में किस तरह से स्थान पाऊं। सुरुचि ने कहा कि तुम्हें अगले जन्म मेरे गर्भ से पैदा होना पड़ेगा।
पांच वर्ष के ध्रुव ने अपनी मां के पास पहुंच कर अपनी पीड़ा बताई। इस अवसर पर मुख्य यजमान मोती चंद्र उपाध्याय, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, गोपी चंद्र उपाध्याय, सुरेश चन्द्र उपाध्याय, रमेश चंद्र उपाध्याय, अरविंद कुमार, इंद्रकुमार, राहुल कुमार, राजेश अग्रहरि आदि मौजूद रहे।