जामों (अमेठी)। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य जीवन की दिशा व दशा बदलने के लिए काफी है। यह कथा मनुष्य को अपने पूर्व जन्म के पुण्य कर्म एकत्र होने पर ही सुनने को मिलती है। कलयुग में इसके श्रवण मात्र से मनुष्य का जीवन सुखमय हो जाता है।
ये बातें क्षेत्र के पूरे गयादीन सिंह मजरे संभई गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को प्रवाचक आचार्य संतोष त्रिपाठी ने कहीं। प्रवाचक ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सारी नैतिक इच्छाओं की पूर्ति करती हुई हमेशा आगे बढ़ाती है। भागवत कथा ही साक्षात कल्पवृक्ष के साथ श्री कृष्ण है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस कथा की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि एक बार नारद ने चारों धाम की यात्रा पूरी की, लेकिन मन को शांति नहीं मिली। नारद जी वृंदावन धाम की तरफ जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक युवती कीगोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे। युवती बोली, महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, एक का नाम वैराग्य एवं दूसरे का नाम ज्ञान है।
ये लोग भी दर्शन करने वृंदावन जा रहे हैं, लेकिन ये लोग अचेतन अवस्था में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर को कही खोजने की जरुरत नहीं है। इनको पाने के लिए मनुष्य को निर्मल मन भाव पूर्ण होकर याद करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान इंद्र कुमार सिंह, डाॅ. अंबेरश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।