अमेठी सिटी। परिवहन कार्यालय में नियमित एआरटीओ की तैनाती न होने से व्यवस्था धड़ाम हो गई है। कार्यभार संबद्ध एआरटीओ के भरोसे है, जो सप्ताह में मात्र दो दिन बैठते हैं। शुक्रवार को वह भी एक बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे। इससे आवेदन परेशान रहे।
कार्यालय में 1780 वाहन पंजीकरण और करीब 300 से अधिक लर्निंग व परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस लंबित हैं। आवेदक लगातार चक्कर काट रहे हैं। इसी बीच लखनऊ परिवहन मुख्यालय की ओर से अमेठी समेत अन्य जिलों को नोटिस जारी कर एजेंसी संचालकों से जवाब मांगा गया है। सहालग सीजन में वाहनों की बढ़ी बिक्री के बावजूद एजेंसियों ने पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया और कार्यालय में शपथ पत्र भी समय से जमा नहीं किए। दर्पण पोर्टल की समीक्षा में मामला पकड़ में आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
तिलोई निवासी राघवेंद्र मिश्रा ने बताया कि तीन सप्ताह पहले लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक बायोमीट्रिक तक नहीं हो पाया। सुरेंद्र वर्मा, निवासी मुसाफिरखाना ने कहा कि उन्होंने एक माह पूर्व नया वाहन खरीदा, लेकिन पंजीकरण के लिए लगातार कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हर बार यही जवाब मिलता है कि अधिकारी नहीं हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एआरटीओ के बिना न तो फाइलों की स्वीकृति हो सकती है और न ही कोई लाइसेंस जारी हो सकता है।
सात दिन में पूरी होती है प्रक्रिया : एआरटीओ
एआरटीओ वीके सिंह ने बताया कि उनके पास प्रतापगढ़ व अमेठी दो जिलों का प्रभार है। वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया डीलर व बाबू के स्तर पर पूरी होती है। किसी भी फाइल को निस्तारित करने में अधिकतम सात दिन समय प्रदान किया गया है। जिसमें सत्यापन की प्रक्रिया डीलर और कार्यालय स्तर से होती है। उसके बाद स्वीकृत प्रदान की जाती है। ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया सारथी पोर्टल दो दिन से संचालित होने पर बाधा आने के कारण कार्य प्रभावित है। फील्ड कार्य होने के कारण दोनों कार्यालयों को समायोजित करते हुए कार्य का निष्पादन करना पड़ता है।