सारस के साथ पूर्व मुख्यमंत्री व आरिफ । फाइल फोटो
अमेठी। राजकीय पक्षी सारस और मोहम्मद आरिफ की दोस्ती में अब न्यायालय के दरवाजे तक ले जाने की तैयारी है। आरिफ को जब कानपुर में पहुंचे दोस्त सारस से मिलने नहीं दिया गया तो उनका दर्द जुबां पर आ गया। इसके बाद उन्होंने यू ट्यूब पर अपना दर्द बयां किया। नम आंखों से कहाकि पाकिस्तान से लोग यहां आकर मोहब्बत के नाम पर रह सकते हैं लेकिन, वह अपने दोस्त से नहीं मिल सकते हैं।
कहा कि जब तक जान है, मिलने की कोशिश करते रहेंगे। जब तक पैरों में चलने का साहस रहेगा, कोशिश करते रहेंगे। कहा कि वह हर बार मिलने का प्रयास करेंगे। इसके लिए वह कोर्ट जाएंगे। कहा कि राज्य पक्षी है, उसे मांग नहीं सकते हैं लेकिन मुलाकात के लिए तो कोर्ट जा सकते हैं। उसकी आजादी के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हर संभव कोशिश करेंगे। यह वीडियो अब चर्चा में है।
शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में आरिफ ने कहा कि अब क्या करें। और कोई रास्ता तो बचा ही नहीं है। उससे मिलने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
क्या है मामला
- अमेठी जिले के जामो ब्लॉक के मंडखा गांव के आरिफ और राजकीय पक्षी सारस की दोस्ती करीब एक वर्ष पहले-पहले हुई थी। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे इतनी गाढ़ी हो गई कि मोहम्मद आरिफ जहां भी जाते सारस पक्षी उनके पीछे-पीछे साये की तरह जाने लगा। मार्च में अमेठी में हर किसी की जुबां पर यह दोस्ती छाई रही। मीडिया में आरिफ की दोस्ती खूब छाई रही। बीते 5 मार्च को अमेठी के एक दिवसीय दौरे पर आए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी आरिफ से मिलने मंडखा गांव पहुंचे। वहां आरिफ के दोस्त सारस से मिले। अखिलेश यादव ने दूसरे दिन दोनों की दोस्ती को लेकर ट्वीट किया। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक के आदेश पर 21 मार्च को राजकीय पक्षी सारस को आरिफ से अलग कर रायबरेली के समसपुर पक्षी बिहार पहुंचा दिया गया। बाद में सारस को कानपुर प्राणि उद्यान भेज दिया गया।