गौरीगंज (अमेठी)। जिले में 100 अस्थाई व सात स्थाई गो आश्रय केंद्रों में क्षमता से अधिक छुट्टा गोवंश संरक्षित हैं। बावजूद इसके 12 हजार से अधिक गोवंश सड़कों पर भटक रहे हैं। यह स्थिति तब है जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदेश जारी कर 31 मार्च तक सभी बेसहारा गोवंशों को संरक्षित कराने का आदेश दे चुके हैं।
पशुपालन विभाग की ओर से गोवंश संरक्षित करने के लिए जिले में तीन वृहद गो-आश्रय केंद्र, तीन कांजी हाउस, एक कान्हा गो-आश्रय केंद्र तथा 100 अस्थाई गोआश्रय केद्र संचालित किया जाता है। संचालित आश्रय केंद्रों पर गोवंश संरक्षित करने के बावजूद सड़कों के साथ सीवान में निराश्रित गोवंश की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।
बीते दिनों गोवंश संरक्षित करने के दावों की पोल उस समय खुल गई जब सांसद/केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से सर्वे कराया तो 15 हजार से अधिक गोवंश सड़कों पर व सीवानों में मिले।
केंद्रीय मंत्री के सर्वे में अमेठी ब्लॉक में 2,395, भादर में 1,621, भेटुआ में 2,481, संग्रामपुर में 568, गौरीगंज में 682, जामो में 234, शाहगढ़ में 291, मुसाफिरखना में 302, जगदीशपुर में 893, शुकुल बाजार में 960, रानीगंज में 1,130, तिलोई में 1173, सिंहपुर में 1916 तथा बहादुरपुर में 33 गोवंश सीवान में होने का मामला प्रकाश में आया। केंद्रीय मंत्री ने पशुपालन विभाग के साथ जिला प्रशासन को पत्र जारी कर निराश्रित गोवंश संरक्षित कराने को कहा। सांसद के निर्देश पर अभियान चलाकर 32 सौ गोवंश संरक्षित किए गए।
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विभाग के दावे पर सवाल
पशुपालन विभाग का दावा है कि जिले में 14 हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। हकीकत पर नजर डालें तो वृहद व कान्हा आश्रय केंद्र में 500 गोवंश तो कांजी हाउस में 300 गोवंश संरक्षित करने की व्यवस्था है। इसी तरह अस्थाई केंद्र पर 50 गोवंश संरक्षित किए जा सकते हैं। ऐसे में सभी आश्रय केंद्र पर महज आठ हजार गोवंश ही संरक्षित हो सकते हैं।
संरक्षण की हकीकत
गोवंश संरक्षण की वास्तविक स्थिति पर नजर डालें तो हर क्षेत्र में छुट्टा गोवंश की भरमार है। निराश्रित गोवंश सीवान के साथ सड़कों पर मौजूद रहते हैं। सीएम की ओर पांच अप्रैल तक निराश्रित गोवंश को संरक्षित करने का समय देने के बावजूद जिले में कोई भी अभियान संचालित नहीं हो रहा है।
लगातार संरक्षित किए जा रहे गोवंश
लोग गोवंश लगातार छोड़ रहे है। ऐसे में संरक्षण करने की कोशिश परवान नहीं चढ़ पा रही है। नियमित अभियान संचालित कर गोवंश संरक्षित करने के साथ मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत पालक व कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को सुपुर्द किया जा रहा है।
डॉ. जेपी सिंह- मुख्य पशु चिकित्साधिकारी