जामों (अमेठी)। समय आ जाने पर मनुष्य की गरीबी दूर हो जाती है और परिवार सुखमय जीवन व्यतीत करने लगता है, बशर्ते अपने आराध्य देव को हमेशा याद करके सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। ये बातें ग्राम पंचायत संभई के गयादीन सिंह गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को प्रवाचक आचार्य संतोष त्रिपाठी महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने बताया कि आजकल के मित्र स्वार्थी हो गए हैं, लेकिन सब ऐसे नहीं होते हैं। मनुष्य का सच्चा मित्र वही होता है जो मित्र के दुख में घर पहुंचकर बेहिचक मदद करता है। कहा कि मनुष्य जीवन में माता-पिता के बाद मित्र को बडा स्थान दिया गया है। भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रता इसकी बड़ी मिसाल है।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म एक राजघराने में हुआ और सुदामा गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। दोनों की दोस्ती शिक्षा ग्रहण करने के दौरान हुई। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश बन गए, जबकि सुदामा गरीब होते चले गए। गरीबी में भी सुदामा प्रभु का नाम लेना नहीं भूले। इस अवसर पर मुख्य यजमान इंद्र बहादुर सिंह, डाॅ. अंबरेश प्रताप सिंह, चंद्रमौलि सिंह, शिवबहादुर, अमन, अमरनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।