गौरीगंज (अमेठी)। खेती-किसानी के प्रति लोगों की रुचि के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विभाग सभी ब्लॉकों के एक-एक राजस्व गांव को मॉडल के रूप में विकसित करेगा।
शासन का निर्देश मिलने के बाद कृषि विभाग गांवों का चयन करने में जुटा है। चयनित गांवों में कलस्टर प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती-किसानी की जानकारी दी जाएगी।
फसल उत्पादन में किसानों की लागत कम करने, अनावश्यक उर्वरक प्रयोग से होनी वाली मृदा तत्वों की हानि रोकने तथा किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने नई योजना पर काम शुरू किया है। योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के एक-एक राजस्व गांव को मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा।
कवायद सफल हो सके इसके लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग गांवों का चयन कर कलस्टर प्रदर्शन के माध्यम से रबी, जायद व खरीफ सीजन में खेती कराते हुए किसानों को आधुनिक विधि से खेती-किसानी करने में प्रोत्साहित करेगा।
योजना सफल हो सके इसके लिए संयुक्त कृषि निदेशक ने उप निदेशक कृषि को पत्र भेजा है। पत्र में ब्लॉकवार मॉडल गांव का चयन करने, चयनित गांवों में जोत आधारित नमूने एकत्र कर गांव में वैज्ञानिक कृषक संवाद कार्यक्रम के साथ आधुनिक विधि से खेती कराते हुए किसानों के फसल उत्पादन को बढ़ाने का निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त चयनित गांवों में मेला/प्रदर्शनी आयोजित कर किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करने को कहा गया है। पत्र मिलने के बाद कृषि विभाग मॉडल गांवों का चयन करने के साथ ही मेला/प्रदर्शनी के आयोजन की तैयारी करने जुटा है।
गांवों का चयन होने के बाद विभाग किसानों को आधुनिक खेती-किसान की जानकारी देते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन विधि बताते हुए विभागीय योजनाओं से लाभान्वित करेगा।
इन निवेश पर मिलेगा अनुदान
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि मॉडल गांव चिन्हित कराए जा रहे हैं। चिन्हित होने के बाद विभागीय योजनाओं में किसानों का चयन कर क्षेत्रीय पंजीकृत केंद्र से उर्वरक एवं कार्बनिक खाद, मृदा सुधारक, जैव उर्वरक व सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ कृषि यंत्र व अन्य विभागीय योजनाओं के अनुदान से उन्हें लाभान्वित किया जाएगा।
होगी निगरानी, बढ़ेगी कृषकों की आय
उपनिदेशक कृषि डॉ. सत्येंद्र सिंह चौहान ने बताया कि योजना के तहत चिह्नित मॉडल गांवों में रबी, खरीफ व जायद सीजन में कृषि मेला/प्रदर्शनी का आयोजन करते हुए किसानों को जागरूक किया जाएगा। योजना की नियमित निगरानी के साथ कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी व आय बढ़ाने के लिए आवश्यकतानुसार उर्वरक के प्रयोग के प्रति किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।