18 : गौरीगंज : कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठकर नारेबाजी करते अधिवक्ता। -संवाद
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गौरीगंज (अमेठी)। सोमवार को कलेक्ट्रेट का नजारा अलग था। अफसरों के रवैये से खफा अधिवक्ता जहां न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर नारेबाजी करते रहे वहीं दूसरी ओर डीएम समेत सभी मजिस्ट्रेट अपने-अपने न्यायालयों में वादों की सुनवाई करते रहे। बवाल न हो इसके लिए पूरा कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में तब्दील रहा। धरना दे रहे अधिवक्ताओं ने अधिकारियों व न्यायालय के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार व घूसखोरी का संगीन आरोप लगाया।
कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह 11 बजे सभी अधिवक्ता एक स्थान पर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। अधिवक्ता लगातार डीएम व एसडीएम समेत सभी अफसरों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष छोटेलाल तिवारी ने कहा कि तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार व घूसखोरी पर अंकुश लगाने के लिए अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधि मंडल तीन नवंबर को डीएम से मिलने गया था। यह मुलाकात बार व बेंच का सामंजस्य बनाए रहने के उद्देश्य से थी। लेकिन डीएम ने प्रतिनिधि मंडल से मिलने से इंकार कर दिया।
इसके बाद जब कोर्ट में मुलाकात हुई तब भी भ्रष्टाचार व घूसखोरी पर अंकुश लगाने के लिए सकारात्मक कार्यवाही नहीं दिखी। डीएम के इस कृत्य से अधिवक्ता संघ क्षुब्ध व अपमानित महसूस कर रहा है। कहा कि अधिवक्ताओं ने आम जनता को भ्रष्टाचार व घूसखोरी से बचाने के लिए यह प्रदर्शन शुरू किया है।
अधिवक्ताओं ने डीएम के फैसले की निंदा करते हुए आगामी चार दिनों तक सुबह 11 से शाम चार बजे तक न्यायिक कार्य से विरत रहने की चेतावनी दी है। कहा कि इस दौरान कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो वे जिले की अन्य तहसीलों का समर्थन लेने के साथ ही मार्ग जाम करने व आमरण अनशन शुरू करने पर विवश होंगे। इस मौके पर महामंत्री उमाशंकर मिश्र, पूर्व बार अध्यक्ष केवल प्रसाद शुक्ल, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कृपाशंकर तिवारी व सूर्य प्रकाश तिवारी समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें अधिवक्ता
जिला मजिस्ट्रेट राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि कोर्ट का संचालन नहीं होने से वादकारियों का हित प्रभावित होता है। उनका हित प्रभावित न हो इसके लिए कोर्ट का नियमित संचालन किया जा रहा है। अधिवक्ताओं को चाहिए कि वे अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें और कोर्ट संचालन में सहयोग करें।