मुसाफिरखाना (अमेठी)। जीवन में शांति और मुक्ति प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के प्रति समर्पण है। सद्गुण अपनाने से ही मनुष्य का जीवन सुखमय होता है। ये बातें गाजनपुर में आयोजित राम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक पंडित अवधेश कुमार तिवारी ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि मनुष्य के भीतर संसार में सुख, आनंद, शांति और मोक्ष प्राप्त करने की लालसा बनी रहती है, लेकिन यही लालसा प्राणियों के दुख का कारण भी बनती है। देवासुर संग्राम के दृष्टांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के मन में सत और असत प्रवृत्तियां होती हैं और इन्हीं के बीच निरंतर संघर्ष चलता रहता है। आज के भौतिक युग में लोग छल, प्रपंच और झूठ के सहारे जीवन में शांति पाने की होड़ में लगे हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि ज्ञान, सौम्यता, विनम्रता, सदाचार और भगवान की कृपा से ही सच्ची शांति प्राप्त होती है। यदि केवल मंदिर में रहने से शांति मिलती तो वहां रहने वाला पुजारी संसार का सबसे सुखी व्यक्ति होता।
प्रवाचक राम मिलन शुक्ला ने सुग्रीव और हनुमान संवाद का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हनुमानजी ने सुग्रीव को प्रेम की महिमा समझाई, क्योंकि प्रेम से ही भगवान की प्राप्ति होती है। प्रेम में इतनी शक्ति होती है कि वह पत्थर को भी भगवान बना सकता है। इसी क्रम में प्रवाचक गंगासागर ने रामचरितमानस के माध्यम से बताया कि मनुष्य किस प्रकार अपने जीवन को पाप रहित बना सकता है। उन्होंने कहा कि रामायण के आदर्शों को अपनाने से ही चरित्र का निर्माण होता है। इस अवसर पर डॉ. हरिद्वार सिंह, राजकुमार सिंह, शिवदयाल सिंह, रघुनाथ सिंह, रामेश्वर पांडे, हरिभान सिंह, पवन कुमार सिंह, बलिकरन सिंह आदि उपस्थित रहे।