भादर के रामगंज में कथा सुनते श्रद्धालु।-संवाद
भादर। रामगंज में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को प्रवाचक आराधना देवी ने कहा कि परोपकार के लिए समर्पित जीवन ही सार्थक है। प्रवाचक ने वामनावतार की कथा सुनाते हुए कहा कि सतयुग में दैत्यराज बलि ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था।
इस पर देवमाता अदिति के आग्रह पर भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) के रूप में अवतार लिया। वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। बलि के संकल्प लेने के बाद वामन ने अपना विराट रूप धारण कर एक पग में पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग नाप लिया। जब तीसरा कदम रखने की जगह नहीं बची तो बलि ने अपना सिर झुका दिया और वामन ने उसके सिर पर पैर रखकर उसे पाताल लोक भेज दिया, जिससे देवताओं को उनका स्वर्ग वापस मिल गया।
कथा के दौरान पंडाल में बैठे श्रद्धालु भगवान विष्ण के जयकारे लगाने लगे। प्रवाचक ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व बाल चरित्र की कथा भी विस्तार से सुनाई। कहा कि बाललीला के दौरान ही भगवान कृष्ण ने कई राक्षसों को मुक्ति प्रदान की। यमुना नदी में रह रहे कालिया नाग के आतंक से गोकुलवासियों को मुक्ति दिलाई। इंद्र के अहंकार को दूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा सुनाकर भगवान के विराट रूप की भी चर्चा की। इस दौरान डाॅ. विजेंद्र प्रताप सिंह, माधुरी सिंह, लीलावती देवी, जितेंद्र प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, वीरेंद्र सिंह, मृत्युंजय सिंह, सूरजलाल, राजकुमार, पिंटू सिंह आदि मौजूद रहे।