अमेठी सिटी। भादर विकासखंड में मनोरमा नदी पर पक्का पुल नहीं होने से ग्रामीण लकड़ी के पुल से आवागमन कर रहे हैं। इसके बाद भी भारी वाहनों के साथ ग्रामीणों को करीब पांच किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। अब मनोरमा नदी पर लघु सिंचाई विभाग की ओर से करीब 86 लाख की लागत से चेकडैम व पुल का निर्माण कराया जाएगा। इससे ग्रामीणों को आवागमन में आसानी होगी।
अग्रेसर गांव के पास मनोरमा नदी पर ग्रामीणों ने करीब पांच साल पहले लकड़ी का पुल बनाया था जो बाद में सड़ गया। ऐसे में अब सोनारी के ग्राम प्रधान आशीष सिंह ने लकड़ी का एक अन्य पुल बनवाया है। हालांकि इस पुल पर भी पैदल व साइकिल से ही गुजरने की आजादी है। सोनारी गांव के प्रधान आशीष सिंह ने बताया कि मनोरमा नदी के पश्चिमी छोर पर सोनारी गांव का पुरवा विश्वासा और जोगियनवा है।
ग्रामीणों को सोनारी मुख्य गांव में बैठक आदि के लिए व रामगंज बाजार आने-जाने में तकरीबन चार किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में लकड़ी का अस्थायी पुल बनवाया गया है, जिसका लाभ अग्रेसर, सोनारी सहित कई गांवों के लोगों को मिल रहा है। कहा कि स्थायी पुल बन जाने से ग्रामीणों की मुश्किल हमेशा के लिए आसान हो जाएगी।
22 मीटर लंबा व पांच मीटर चौड़ा होगा पुल
अग्रेसर व सोनारी के बीच बनने वाला पुल करीब 22 मीटर लंबा व पांच मीटर चौड़ा प्रस्तावित है। इसका निर्माण कार्य लघु सिंचाई विभाग की ओर से किया जाएगा। विभाग के सहायक अभियंता मो. जुबैर अहमद ने बताया कि इस पुल पर दो चार पहिया वाहन एक साथ निकल सकेंगे। ग्रामीणों के अनुसार अभी तक अग्रेसर से भादर जाने के लिए लोग लकड़ी के पुल के सहारे सोनारी, जोगियनवा, सिंगठी होते हुए भादर जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ से लोग पैदल व साइकिल से इस रास्ते रामगंज जाते हैं। जबकि दोपहिया व अन्य वाहन से करीब पांच किमी घूमकर जाना मजबूरी है।
चेकडैम से मिलेगी सिंचाई की सुविधा
मनोरमा नदी में बरसात के दिनों में पानी ज्यादा होता है, जबकि गर्मियों में पानी घट जाता है। मौके पर पुल के साथ ही चेकडैम का निर्माण प्रस्तावित है। चेकडैम बन जाने लोगों को सालभर खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसी के साथ भूमिगत वाटर रीचार्ज भी होगा, जिससे त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र में हो रहे जलदोहन को संतुलित किया जा सकेगा।