गौरीगंज (अमेठी)। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से जिले में संचालित मदरसों का सर्वेक्षण पूरा हो गया है। रिपोर्ट 25 अक्तूबर को जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेज दी जाएगी। जिले में संचालित 131 मदरसों में 70 मदरसे बिना मान्यता संचालित पाए गए हैं।
सितंबर के पहले सप्ताह में शासन ने मदरसों की जांच का निर्देश जारी किया था। जिला प्रशासन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीएसए व सभी तहसीलों के एसडीएम के नेतृत्व में टीम गठित कर मदरसों की 12 बिंदुओं पर जांच करने को कहा गया था। 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक हुई जांच के दौरान टीमों ने जिले में संचालित 131 मदरसों की जांच की।
इन मदरसों में से 50 मदरसे (38.16 प्रतिशत) बिना किसी मान्यता के संचालित पाए गए। वहीं 20 मदरसे उस नदवा कॉलेज लखनऊ से ली गई मान्यता पर संचालित मिले जिसकी मान्यता को राज्य सरकार पहले ही अवैध घोषित कर चुकी है। टीमों ने जांच में यह भी पाया कि कई मदरसों के पास न तो कोई उपस्थिति रजिस्टर है न अन्य जरूरी अभिलेख। एक माह तक चली जांच के बाद अब विभाग रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटा है।
यह रिपोर्ट 25 अक्तूबर से पहले जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेज दी जाएगी। वहीं जांच के दौरान जायस, जगदीशपुर, सिंहपुर व मुसाफिरखाना क्षेत्र में 10 मदरसे मस्जिद परिसर में संचालित मिले। यह मदरसे कुल 131 की संख्या से बाहर हैं। मस्जिदों के बाहर न तो इन मदरसों से जुड़ा कोई बोर्ड लगा था न ही इनके पास बच्चों के पंजीकरण व अन्य तथ्यों की जानकारी से जुड़ा कोई रजिस्टर ही था।
जांच टीमों ने पाया कि करीब 20 मदरसों मेें इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। कहीं डेस्क बेंच नहीं है तो कहीं ब्लैकबोर्ड तक नहीं। कहीं बिजली नहीं तो कहीं बिल्डिंग नहीं। इस दौरान 15 मदरसे ऐसे भी मिले जहां सुबह महज दो घंटे (अन्य मदरसों में पांच घंटे पढ़ाई का प्राविधान) ही बच्चों को धार्मिक तालीम दी जाती है। इसके बाद यह बच्चे प्राथमिक या नर्सरी समेत अन्य विद्यालयों में पढ़ने चले जाते हैं।
बिना मान्यता संचालित मदरसों की संख्या
मुसाफिरखाना - 30
तिलोई - 30
गौरीगंज - 09
अमेठी - 01
मान्यता प्राप्त मदरसों की तहसीलवार संख्या
मुसाफिरखाना - 22
तिलोई - 23
गौरीगंज - 05
अमेठी - 11
कोरोना काल में बंद हुए 30 मदरसे
जांच टीमों ने यह भी पाया कि कोरोना काल से पहले जिले में कुल 160 मदरसे संचालित हो रहे थे। इन मदरसों में से 30 दो वर्ष के कोरोना काल में बंद कर दिए गए। टीमों को न तो यहां कोई मिला न ही कोई बोर्ड ही मिला। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर टीमों ने इन मदरसों के बारे में भी जानकारी एकत्र की।
चंदे से होता है संचालन
जांच टीमों ने मदरसों में मौजूद अभिलेखों को खंगाला तो पाया कि मदरसों को संचालित रखने के लिए कई तरीकों से फंडिंग होती है। कुछ मदरसों का संचालन फसली चंदा (सभी फसली में होने वाले उत्पादन से एकत्र राशन को बेचकर प्राप्त धनराशि) से तो कुछ का रमजान में मिले जकात की 2.5 प्रतिशत राशि से होता है। कुछ मदरसों के अभिलेखों में दिल्ली व मुंबई जैसे शहरों में रहने वालों से चंदा मिलने की बात भी दर्ज थी।
दूसरे जिलों के बच्चे व दूसरे प्रांतों के शिक्षक
जिले में 10 मदरसे लिखा पढ़ी में आवासीय हैं। इन 10 मदरसों में न्यूनतम बच्चों की संख्या 50 है। सिंहपुर के एक व बहादुरपुर के दो आवासीय मदरसों में गोंडा, बस्ती, बहराइच आदि दूरस्थ जिलों के अलावा बिहार प्रांत के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते मिले। इसी तरह बाजार शुकुल में संचालित एक मदरसे में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार प्रांत से आए शिक्षक भी शिक्षा कार्य करते मिले।
एक मदरसे में 1354 बालिकाएं पंजीकृत
जांच टीम ने बहादुरपुर ब्लॉक के सोनार गांव तेदुआ में संचालित आवासीय मदरसा जामिया उम्माहतुल मोमेनीन लिल बनात का निरीक्षण भारी सुरक्षा बल के साथ किया। आठ बीघे में फैली यहां की बिल्डिंग किसी बड़े कॉलेज जैसी है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस मदरसे की बिल्डिंगों पर 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यहां 1354 बालिकाएं पंजीकृत मिलीं। हालांकि यह मदरसा भी अवैध घोषित नदवा से मान्यता लेकर संचालित मिला। यहां के अभिलेखों से तमाम अन्य जानकारियां भी मिली हैं जिसका उल्लेख रिपोर्ट में किया जाएगा।
जांच पूरी, रिपोर्ट तैयार
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र पांडेय ने बताया कि जांच का कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट में सभी निर्धारित 12 बिंदुओं पर मिली खामियों का उल्लेख किया गया है। डीएम के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। बाद में शासन के निर्देश पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।