अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार अमेठी में वक्फ बोर्ड की 1205 संपत्तियां हैं। इनमें 1194 सुन्नी और 11 शिया वक्फ बोर्ड की हैं। तहसीलवार आंकड़े पर नजर डालें तो सुन्नी वक्फ बोर्ड की गौरीगंज में 220, मुसाफिरखाना में 242, तिलोई में 553 और अमेठी में 179 संपत्तियां दर्ज हैं। इसी तरह शिया वक्फ बोर्ड की तिलोई में नौ और मुसाफिरखाना में दो संपत्तियां हैं।
अभी जिले में वक्फ बोर्ड की 477 संपत्तियां ऐसी हैं जो सरकारी जमीन हैं। अब विभाग विवादित संपत्तियों को लेकर सरकार के आदेश की प्रतीक्षा में है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि जिले में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर कहीं भी विवाद नहीं है। सरकारी जमीन पर बनी 477 संपत्तियों को लेकर सरकार के आदेश का इंतजार है। मामले में जो भी निर्देश होगा उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की ओर से वक्फ मामले में सतर्कता बरती जा रही है। एएसपी हरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले को चार जोन व 17 सेक्टर में बांटकर निगरानी की जा रही है। जगदीशपुर, जायस, इन्हौंना, बाजारशुकुल में एक प्लाटून पीएसी भी एहतियातन तैनात की गई है। फुट पेट्रोलिंग के साथ गांव में गश्त बढ़ाई गई है।
वक्फ बिल को कुछ ने सराहा तो कुछ ने किया विरोध
तय होगी जवाबदेही
वक्फ संशोधन बिल को लेकर जगदीशपुर के तौसीफ का कहना है कि अब तक वक्फ कुछ लोगों की ही संपत्ति थी। मस्जिद में दुकानें आदि पर कुछ लोग कब्जा करके बैठे थे। वक्फ संपत्ति सरकार के अधीन हो जाने पर अब जवाबदेही तय होगी।
मुस्लिम समाज के लिए सही
खैरातपुर निवासी व बारा-रवी-उल कमेटी के सदस्य मोहम्मद एखलाक ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल के आ जाने से मुसलमानों का भविष्य सुधरेगा। इससे वक्फ के नाम पर चल रही मनमानी रुकेगी। मुस्लिम समाज की बेहतरी के लिए यह संशोधन सही है।
आबाद हैं पीढि़यां
तिलोई के मौलाना सईद ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां परिवारवाद के हवाले थीं। परदादा के जमाने से हुए कब्जे पर उनकी पीढि़यां आबाद हैं। मस्जिद की दुकानों का पहले 150 रुपये किराया था जो आज 10 हजार से अधिक होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है।
बोर्ड में बाहरी व्यक्ति स्वीकार नहीं
कमरौली के कठौरा में स्थित मस्जिदे-उमर के सचिव माज अहमद काशिफ ने कहा कि वक्फ बोर्ड की पहली शर्त है कि इसमें मुस्लिम समाज के लोग ही शामिल रहें। वक्फ बोर्ड में किसी अन्य धर्म के लोगों का प्रवेश कतई स्वीकार नहीं करेंगे।
संशोधन गलत है
जगदीशपुर क्षेत्र में मुस्लिम मामलों के जानकार मौलाना तलत रसूल ने कहा कि बिल में संशोधन गलत है। उन्होंने वक्फ बोर्ड में महिलाओं और अन्य धर्म के लोगों की नियुक्ति के सवाल पर नाराजगी जताई।