अमेठी सिटी। शादी, धार्मिक आयोजन या अन्य कार्यक्रमों में तेज आवाज में डीजे बजाना अब भारी पड़ सकता है। तेज ध्वनि से सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी और रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए पुलिस-प्रशासन ने जिले के 414 डीजे संचालकों को रडार पर लिया है। थानों में सूची तैयार कर निगरानी बढ़ा दी गई है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी।
आंकड़ों के अनुसार गौरीगंज में 14, जामों में 11, मुंशीगंज में 36, मुसाफिरखाना में 54, जगदीशपुर में 13, कमरौली में 18, बाजारशुक्ल में 24, भाले सुल्तान में 14, अमेठी में 26, संग्रामपुर में 17, रामगंज में 12, पीपरपुर में 34, जायस में नौ, मोहनगंज में 42, शिवरतनगंज में 19, फुरसतगंज में 26 और इन्हौना में 22 डीजे संचालक हैं। एएसपी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि सभी थानों में डीजे संचालकों की सूची तैयार कराई गई है। संचालकों को समय और ध्वनि मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजे-लाउडस्पीकर सुबह छह से रात 10 बजे तक बजाए जा सकते हैं। रात 10 से सुबह छह बजे तक इनके इस्तेमाल पर रोक है। सार्वजनिक स्थानों पर पूर्व अनुमति लेना भी जरूरी है।
तेज आवाज से नुकसान
डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि तेज ध्वनि का कान, दिल और दिमाग पर प्रतिकूल असर पड़ता है। शोर में रहने से सुनने की क्षमता कम होने, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और नींद में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर इसका असर अधिक हो सकता है। तेज ध्वनि से पशु-पक्षियों में भी घबराहट और असामान्य व्यवहार की स्थिति बन सकती है।