जगदीशपुर। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित लोहिया पुल के स्थान पर 2.61 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित नए पुल निर्माण को अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इस कारण औद्योगिक इकाइयों के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजाना आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सेक्टर-13 और सेक्टर-14 को जोड़ने वाला लोहिया पुल वर्ष 1984 के आसपास निर्मित हुआ था। वर्तमान में यह पुल बेहद संकरा और जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। पुल से एक समय में केवल एक दिशा का वाहन गुजर पाता है। भारी वाहन इस पुल से नहीं निकल पाते, जिससे उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद भेजने में चार से पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इससे परिवहन समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
यूपीसीडा स्तर पर नए पुल का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा जा चुका है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू वाराणसी के प्रोफेसर स्तर से स्टीमेट, डिजाइन की ड्राइंग का प्रमाणीकरण भी हो चुका है। इसके बावजूद अंतिम स्वीकृति अब तक नहीं मिल सकी है। पहले इस पुल निर्माण का प्रस्ताव सिंचाई विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था, लेकिन कई वर्षों बाद सिंचाई विभाग ने निर्माण से इनकार कर दिया। इसके बाद एनओसी में भी समय लगा। एनओसी मिलने के बाद भी प्रस्ताव स्वीकृति स्तर पर अटका हुआ है।
नया पुल बनने से दूर होगी परेशानी
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष इंजीनियर संजय सिंह का कहना है कि संकरा पुल औद्योगिक विकास में बाधा बन रहा है। आईआईए चैप्टर अमेठी के अध्यक्ष हेमंत विक्रम सिंह ने बताया कि भारी वाहनों को दूर से घुमाकर लाना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है। उद्यमी मोहम्मद असलम, सुशील सिंह, अब्दुल जावेद, उमा शंकर साहू और रामशंकर का कहना है कि नया पुल बनने से वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। पुल निर्माण न होने से सेक्टर-13 और सेक्टर-14 के साथ ढुढेहरी, लाल खां सिठौली, पूरे झब्बू करन गांव और तिलोई तहसील के बहुआ गांव के लोगों को लखनऊ–वाराणसी हाईवे तक पहुंचने में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
मुख्यालय भेजा गया है प्रस्ताव
यूपीसीडा निर्माण खंड-छह जगदीशपुर के सिविल प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि पुल निर्माण का प्रस्ताव मुख्यालय भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।