परिषदीय विद्यालयों में नौकरी देने के नाम पर आवेदकों से ऑनलाइन व ऑफलाइन फार्म भरवाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं फार्म के साथ सामान्य व ओबीसी वर्ग के आवेदकों से 300 रुपये व एससी/एसटी आवेदकों से 200 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट व ऑनलाइन भुगतान ग्राम शिक्षा परिषद, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के नाम पर कराया जा रहा था।
इस फर्जीवाड़े का शनिवार को खुलासा होने पर आवेदकों में हड़कंप मच गया। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से जानकारी की तो पता चला कि शासन से ऐसी किसी नौकरी के लिए आवेदन नहीं मांगा गया है। यह जानकारी होने के बाद से आवेदक अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
मालूम हो कि लगभग छह माह पूर्व ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुपरवाइजर, कार्यकर्त्री व सहायिका पद पर सीधी तैनाती के लिए आवेदन मांगा गया था। ऐसे विज्ञापन के झांसे में आकर बहुत से लोगों ने आवेदन किया लेकिन बाद में असलियत पता चलने पर मायूसी हुई। इस बीच शनिवार को नौकरी के नाम पर एक और फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया।
जानकारी के मुताबिक बीते दिनों एक वेबसाइट पर ग्राम शिक्षा परिषद, लखनऊ उत्तर प्रदेश के नाम से परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी पदों पर तैनाती के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें प्रधानाचार्य के 5131 पद, शिक्षक के 10 हजार 262 व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के लिए 5 हजार 131 पद दर्शाए गए।
आवेदन फार्म में प्रधानाचार्य पद के लिए शैक्षित योग्यता स्नातक व समकक्ष उत्तीर्ण, शिक्षक के लिए इंटरमीडिएट उत्तीर्ण व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के लिए 8वीं पास अर्हता मांगी गई। विज्ञापन में प्रधानाचार्य को 19 हजार 500 रुपये प्रतिमाह, शिक्षक के 15 हजार व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के लिए 7 हजार रुपये का वेतन बताया गया।
17 अक्तूबर 2015 तक ऑनलाइन व 20 अक्तूबर 2015 तक ऑफलाइन आवेदन मांगे जाने के साथ ही सामान्य व ओबीसी वर्ग आवेदकों को 300 रुपये व एससी/एसटी आवेदकों को 200 रुपये ग्राम शिक्षा परिषद के नाम डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का भी निर्देश दिया गया। जिले के 500 से अधिक युवाओं ने आवेदन भी कर दिया।
नौकरी के नाम पर इस गोरखधंधे का खुलासा शनिवार को उस समय हुआ जब अकबरपुर निवासी युवक संतोष, अकांक्षा तिवारी, वंदना गुप्ता, राजेश आदि ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से आवेदन के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि शिक्षा विभाग से इस तरह के कोई आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं।
बीएसए डॉ. राजबहादुर मौर्य ने बताया कि शासन से ऐसा कोई आवेदन नहीं निकला है। यदि कोई आवेदन निकलता तो इसकी जानकारी पहले विभाग को दी जाती। यह पूरी तरह फर्जी है। युवाओं को ऐसे आवेदनों से बचना चाहिए।