गौरतलब है कि पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद के लिए बड़ी संख्या में युवाओं व महिलाओं ने भी परचा दाखिल किया था। शुरू से ही कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार जीत हासिल करने वालों में युवाओं व महिलाओं की संख्या अधिक होगी।
रविवार को जब मतपेटिका में कैद दावेदारों के भाग्य खुलने शुरू हुए, तो पूर्व में लगाए गए अनुमान सही साबित हुए। कटेहरी विकास खण्ड के तिवारीपुर ग्राम पंचायत से 21 वर्षीय युवा आलोक तिवारी ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। उसके पिता चंडूली तिवारी यहां से प्रधान रह चुके हैं।
मरथुआ सरैया ग्राम पंचायत से रीना यादव (23 वर्ष) ने पहली बार कोई चुनाव लड़ा। उन्हें इसमें जीत भी हासिल हुई। बनगांव डिहवा ग्राम पंचायत से युवा पंकज विश्वकर्मा ने जीत दर्ज कर सभी को चौंकाया। अकबरपुर ब्लाक के इटरौरा गांव से लगभग 23 वर्षीय बिंद्रावती को मतदाताओं ने अपना ग्राम प्रधान चुना है। अन्य विकास खंडों में भी युवाओं व महिलाओं ने प्रधान पद पर जीत का परचम लहराने में सफलता पाई है।
इन परिणामों से निश्चित तौर पर ग्राम पंचायत की राजनीति में दबदबा रखने वाले तमाम धुरंधरों को करारा झटका लगा है। राजनीति पर अपनी पैनी नजर रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता डा. रमाकांत मिश्र ने इसे आने वाले समय के लिए एक शुभ संकेत बताया।
कहा कि जिस प्रकार से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में कई युवा चेहरे सामने आए, उसी प्रकार से ग्राम प्रधान पद के लिए भी बड़ी संख्या में युवाओं व महिलाओं ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा महिलाओं की जीत से भी एक अच्छा संदेश समाज में गया है।