अंबेडकरनगर। आउट सोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों ने एक माह का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बावजूद काम करने से इंकार कर दिया। इनका कहना है कि एक माह से कुछ भला होने वाला नहीं है। कार्यकाल लंबे समय के लिए बढ़ाया जाए। जब तक ऐसा नहीं होगा, वे कार्य नहीं करेंगे। उधर, स्टाफ की कमी के चलते जिला अस्पताल में मरीजों का सुचारु रूप से इलाज नहीं हो पा रहा है। इमरजेंसी के दो वार्ड मंगलवार को भी बंद रहे। इससे गंभीर मरीजों के तत्काल इलाज में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नाराज मरीज व तीमारदारों ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को मरीजों की फिक्र नहीं है।
आउट सोर्सिंग पर रखे गए 57 कर्मचारियों का कार्यकाल बीते दिनों समाप्त हो गया था। एक साथ 57 कर्मचारियों के हटने से जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गईं। पहले ही दिन से इमरजेंसी के तीन वार्ड के सापेक्ष दो वार्ड बंद रहे। मंगलवार को भी यही स्थिति बनी रही।
इसके अलावा विभिन्न प्रकार की जांचें भी प्रभावित हो रही हैं। हटाए गए कर्मचारियों के लगातार धरना-प्रदर्शन के बीच बीते दिनों शासन ने मौखिक रूप से कर्मचारियों का कार्यकाल एक माह बढ़ाने का निर्देश अस्पताल प्रशासन को दिया था। कर्मचारियों ने इसे मानने से इंकार कर दिया। कर्मचारी अजीत पाल, अरविंद, दिनेश, अनीता, ज्योति, नेहा, प्रीति, बृजेश, बाबूराम आदि ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक कार्यकाल स्थायी रूप से नहीं बढ़ाया जाता, तब तक वे कार्य नहीं करेंगे।
प्रभावित हो रही स्वास्थ्य सेवाएं
स्टॉफ की कमी के चलते जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। मंगलवार को भी इमरजेंसी के वार्ड दो व तीन बंद रहे। छह बेड वाले मात्र एक वार्ड के संचालन से गंभीर रूप से आए मरीजों को तत्काल इलाज में मुश्किलें उठानी पड़ीं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए पहुंचे मरीजों को भी लंबी लाइन में लगकर नंबर का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। तीमारदार राकेश कुमार, कृष्णावती, सुलेखा, जगदीश, अमरदीप व गंगाराम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कर्मचारियों के हटने का समय निर्धारित था। इसकी जानकारी होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इस मामले में सीएमएस डॉ. एसपी गौतम ने कहा कि अनुभव के आधार पर कर्मचारियों का कार्यकाल बढ़ाए जाने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। फिलहाल एक माह का कार्यकाल बढ़ाया गया है, लेकिन कर्मचारी इसे नहीं मान रहे। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए जो स्टाफ है, उसी से काम लिया जा रहा है।