तीसरे चरण के मतदान में पोलिंग पार्टियों से जुड़े ज्यादातर मतदान कर्मियों ने विद्यालयों में बने एमडीएम से अपनी भूख मिटाई। कुछ जगहों पर जरूर पंचायत प्रतिनिधियों के घर से भोजन पहुंचाया गया।
पुलिसकर्मियों के लिए संबंधित थानों के मेस से भोजन का पैकेट उपलब्ध कराया गया। प्रत्याशियों व उनके समर्थकों से आमतौर पर किनारा कसे रहने का एक नतीजा यह भी रहा कि विवाद के मामले इस बार कम आए।
मालूम हो कि निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव में लगे कर्मचारियों को यह सख्त निर्देश दे रखा था कि वे चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी प्रत्याशी या उसके समर्थक के घर का आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे। उनका दिया भोजन या नाश्ता भी नहीं किया जाएगा।
ऐसा करने पर न सिर्फ मतदान की निष्पक्षता पर असर पडने की संभावना बन जाती है वरन कई बार इसे लेकर ग्राम पंचायतों में विवाद की स्थिति बनी रहती है। इसका असर मतदान पर भी कई बार दिखने लगता है। इसी से बचने के लिए ही निर्वाचन आयोग ने इस बार पूर्व से लागू इन प्रतिबंधों को इस बार और सख्त करने का निर्णय लिया था।
अमर उजाला टीम ने तीसरे चरण के इस मतदान में कई बूथों का जायजा लिया, तो वहां मतदान में लगे कर्मचारी मध्याह्न भोजन योजना का ही लाभ उठाते नजर आए। अकबरपुर विकास खंड का अरिया मतदान केन्द्र प्राथमिक विद्यालय अरिया में बना था। यहां पर रसोइए द्वारा मतदान कर्मियों के लिए भोजन व नाश्ता बनाया जा रहा था।
प्राथमिक विद्यालय अफजलपुर मतदान केन्द्र व टांडा के खासपुर मतदान केन्द्र पर भी रसोइया मजदूरों ने ही कर्मचारियों के लिए भोजन बनाया था। टांडा विकास खंड के खासपुर में केन्द्र प्राथमिक विद्यालय में बना था। यहां एमडीएम नहीं बना था। भोजन एक पंचायत प्रतिनिधि के घर से आना बताया गया।
टांडा व अकबरपुर के कई अन्य केन्द्रों पर कर्मचारियों को एमडीएम से ही काम चलाना पड़ा। उधर पुलिसकर्मियों के लिए संबंधित थानों के मेस से भोजन उपलब्ध कराया गया। अपर जिलाधिकारी रामसूरत पाण्डेय ने कहा कि कर्मचारियों के लिए एमडीएम की व्यवस्था सभी केन्द्रों पर की गई थी। इसकी निगरानी भी की गई, कहीं से कोई शिकायत सामने नहीं आयी।