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Ambedkar Nagar News: ट्रेनों की बंद हुई दौड़ तो बदहाल होने लगा कपड़ा उद्योग

Mon, 16 Dec 2024 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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बदहाल पड़ा टांडा रेलवे स्टेशन।
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अली रहबर
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अंबेडकरनगर। परिवहन की समुचित व्यवस्था न होने से जिले में कपड़ा उद्योग बदहाली की तरफ तेजी से बढ़ रहा। बुनकर नगरी टांडा से यात्री ट्रेन का संचालन बंद होने व बस का किराया अधिक होने से बुनकरों के सामने अन्य बड़े शहर व प्रांत में बिक्री के लिए जाने वाले बुनकरों को बड़ी आर्थिक चपत लग रही। इससे लागत निकालना मुश्किल हो रहा। इसी का नतीजा है कि अब बुनकर पावरलूम बंद कर दूसरे काम की तरफ रुख कर रहे।
एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत अंबेडकरनगर जनपद को कपड़ा उद्योग के लिए चयनित किया गया है। मौजूदा समय में जिले में एक लाख से अधिक पावरलूम संचालित हैं। लगातार महंगी होती बिजली व महंगे धागे के चलते कपड़ा उद्योग को तगड़ा झटका लग रहा है। इसी का नतीजा है कि बुनकर अब इससे इतर भी काम करने लगे हैं।
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इन सबके बीच कपड़ा उद्योग के बढ़ावा में सबसे बड़ी बाधा परिवहन बन रहा है। बुनकर नगरी टांडा में बने कपड़े अंबेडकरनगर के अलावा कानपुर, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, कोलकाता बिक्री के लिए जाते हैं। अराफाती रूमाल भी टांडा कपड़ा उद्योग को नई पहचान दी है। हालांकि अब परिवहन की समुचित व्यवस्था न होने से कपड़ा उद्योग दम तोड़ रहा है।
लगभग चार दशक पहले टांडा से अकबरपुर तक यात्री ट्रेन का संचालन हो रहा था। इसका बुनकर बढ़ चढ़कर लाभ उठा रहे थे। ट्रेन का संचालन बंद होने से बुनकर परिवहन निगम की बस पर आश्रित हो गए। टांडा नगर से परिवहन निगम की बस के संचालन न होने से कानपुर, दिल्ली व अन्य शहरों में जाने के लिए उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अकबरपुर तक जाना पड़ता है। हालांकि दिल्ली के लिए तीन बस राजेसुल्तानपुर से टांडा होते हुए जाती है, लेकिन इसका बेहतर ढंग से लाभ नहीं मिल रहा।
इसी प्रकार बुनकर बाहुल्य क्षेत्र जलालपुर व जहांगीरगंज के बुनकरों को भी परिवहन की समस्या से संघर्ष करना पड़ रहा है। जलालपुर नगर से सरकारी बस का संचालन न होकर उससे लगभग तीन किमी दूर संदहां से होता है, जबकि जहांगीरगंज से कोई बस नहीं जाती। इससे बुनकरों को निजी वाहनों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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दुरुस्त हो परिवहन सेवा, तो बने बात
टांडा के बुनकर मोहम्मद हुसैन अंसारी ने कहा कि यदि ट्रेन का संचालन टांडा से होता, तो इससे अकबरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचकर वहां से दूसरी ट्रेन से लखनऊ, कानपुर व दिल्ली समेत अन्य प्रांत जाना आसान होता। ट्रेन का किराया भी कम होता है। बस से यात्रा करने पर किराया अधिक लगता है। इससे लागत निकालना मुश्किल हो रहा। एक अन्य बुनकर इम्तियाज अहमद ने कहा कि ट्रेन के संचालन की मांग लंबे समय से की जा रही, लेकिन जिम्मेदार गंभीरता नहीं दिखा रहे। जनप्रतिनिधियों से भी इस संबंध में कई बार शिकायत दर्ज कराई। सिर्फ आश्वासन ही मिला। एक अन्य बुनकर दानिश अहमद ने कहा कि चार दशक पहले टांडा से जब छुकछुक करती भाप इंजन वाली ट्रेन अकबरपुर जाती थी, तो इसका बुनकरों को बड़ा लाभ मिलता था, लेकिन जब से यह ट्रेन बंद हुई है, तो परिवहन समस्या बढ़ गई है।
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