अंबेडकरनगर। पांच एजेंसियों के 55 केंद्रों पर पहली अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होगी। इसके लिए खाद्य एवं विपणन कार्यालय ने सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर लिए जाने का दावा किया है। न सिर्फ केंद्रों पर कांटा-बाट बल्कि बोरा भी पहुंचा दिए गए हैं। हालांकि अभी शुरुआती दौर में लगभग एक सप्ताह तक सन्नाटा रहने की उम्मीद है। कारण यह कि ज्यादातर फसल अभी खेतों में ही है।
धान खरीद को सकुशल निपटाने के बाद अब प्रशासन का पूरा ध्यान पहली अप्रैल से प्रारंभ हो रहे गेहूं खरीद पर है। गेहूं बेचने में किसानों की सुविधा के लिए पांच एजेंसियों के 55 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।
इनमें खाद्य विभाग के 12, पीसीएफ के 36, यूपीएसएस के पांच, मंडी समिति का एक व भारतीय खाद्य निगम का एक क्रय केंद्र शामिल है। क्रय केंद्रों पर बोरा व कांटा-बाट भी पहुंचा दिए जाने का दावा खाद्य एवं विपणन कार्यालय ने किया है।
गौरतलब है कि जिले में लगभग 3.85 लाख किसानों ने एक लाख 15 हेक्टेअर रकबे में गेहूं की बुआई की है। इस बीच गेहूं बेचने के लिए किसान पंजीकरण कराने लगे हैं। खाद्य एवं विपणन विभाग के अनुसार अब तक 806 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। 12 किसानों का सत्यापन भी हो गया है। 794 किसानों का भी शीघ्र ही सत्यापन कर लिया जाएगा।
कटरिया निवासी सुनील कुमार ने कहा कि सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में 110 रुपये की वृद्धि की है। ऐसे में समर्थन मूल्य 2125 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है। आढ़ती घर से ही 2150 रुपये से 2170 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तक गेहूं खरीद कर रहे हैं। कुछ आढ़ती ऐसे हैं जिन्होंने किसानों से संपर्क कर उन्हें एडवांस भी दे दिया है। कहा गया है कि जो भी मार्केट रेट होगा, उसी पर खरीदा जाएगा।
गौहन्ना निवासी सुजीत जायसवाल ने कहा कि जब आढ़ती घर से ही अधिक दाम देकर गेहूं की खरीद कर रहे हैं तो किसान क्रय केंद्र पर क्यों जाएंगे। क्रय केंद्र पर जाने के लिए ढुलाई का खर्च आता है। आढ़ती द्वारा खरीदे जाने पर यह खर्च बचता है। अधिक दाम भी मिलता है और नकद भुगतान भी हो जाता है।
पहली अप्रैल से 55 क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू हो रही है। सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसानों को चाहिए कि वे पंजीकरण करा लें जिससे उनकी उपज की खरीद सुचारू रूप से हो सके।
-राजेश कुमार, खाद्य एवं विपणन अधिकारी