अंबेडकरनगर में खेतों में ऐसे पड़ी गेहूं की कटी फसल।
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मौसम में अचानक आए बदलाव ने लगभग 1 लाख 19 हेक्टेअर में गेहूं की बुआई करने वाले जिले के 3 लाख से अधिक गेहूं किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह से ही दरअसल आसमान पर रह-रह कर काले बादल उमड़ते-घुमड़ते रहे। इससे पूरे दिन बारिश की आशंका बनी रही। देर शाम तक भी बारिश की आशंका दूर नहीं हुई।
ऐसे में यदि बारिश हुई तो किसानों को व्यापक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अधिकतरा किसानों के गेहूं की तैयार फसल अब भी खेतों में खड़ी है। जिन किसानों ने गेहूं की कटाई कर भी ली है, उन्होंने मड़ाई के लिए बोझ बनाकर अभी खेतों में डाल रखा है।
बीते कुछ दिनों से तापमान में हो रही वृद्धि से आम लोगों को भीषण गर्मी से अवश्य जूझना पड़ रहा था, लेकिन गेहूं की फसल के लिए यह काफी लाभप्रद था। ऐसे में तैयार हो चुकी गेहूं की फसल की कटाई का दौर तेजी से शुरू हो गया। सुबह से ही कटाई का दौर शुरू होता है, जो देर शाम तक चलता रहता है।
गुरुवार सुबह भी गेहूं कटाई के लिए किसान ने जब अपना रुख खेतों की तरफ किया, तो मौसम के चलते उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। कारण यह कि सुबह से ही आसमान पर काले बादल उमड़ने-घुमड़ने लगे। कभी-कभी तो ऐसा लगने लगा कि यह काले बादल अब बरस ही पड़ेंगे।
यह देख कटाई के कार्य में लगे किसानों के हाथ तेजी से चलने लगे। जिन किसानों की फसल कट चुकी थी और बोझ बनकर खेतों में पड़ा था, वे उसे बारिश के पानी से बचाने की जुगत में लग गए। किसान बस यही दुआ कर रहे थे कि बारिश न हो।
बताते चलें कि गेहूं की बुआई के लिए अग्रणी जिलों में शामिल अंबेडकरनगर जनपद में लगभग 3 लाख किसानों ने लगभग 1 लाख 19 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई कर रखी है। जिला कृषि अधिकारी सुभाषचन्द्र ने कहा कि बादलों से फिलहाल कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यदि बारिश होती है तो इसका प्रतिकूल असर निश्चित तौर पर पड़ेगा। उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा।