राजप्रताप सिंह
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की सुध नहीं है। लगभग दो वर्ष हो गए, लेकिन पानी की शुद्धता व गुणवत्ता की जांच नहीं कराई जा सकी है। जबकि प्रत्येक छह माह पर पानी की जांच कराए जाने का नियम है। इसके बावजूद यहां इसका उल्लंघन किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक ओपीडी होती है। जबकि 100 से अधिक मरीज भर्ती होते हैं। करीब 300 तीमारदार भी प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंचते हैं। इन सभी को शुद्ध पानी मुहैया कराने की तरफ अस्पताल प्रशासन व जल निगम का ध्यान नहीं है। यह हाल तब है जब इलाज के लिए आने वाले मरीजों के इलाज के दौरान चिकित्सक अक्सर उन्हें शुद्ध पानी का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। इन सबके बीच जिला अस्पताल में ही मरीजों को मिलने वाले वाले पेयजल की शुद्धता व गुणवत्ता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे। कारण यह कि दो वर्ष का समय पूरा होने को है, लेकिन मरीजों व तीमारदारों को उपलब्ध होने वाले पानी की जांच नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल प्रशासन के रिकार्ड के अनुसार 28 जून 2022 को जल निगम की टीम ने जांच की थी। जांच के दौरान पानी में जीवाणु व रासायनिक पदार्थ की जांच की जाती है। पिछले दो वर्ष से इनकी जांच नहीं हो सकी है। इसके लिए जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से जलनिगम को पत्र लिखा भी गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को कितना शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
जिम्मेदार दिखाएं गंभीरता
सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष पाठक ने कहा कि जिला अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को शुद्ध पेयजल का उपयोग किए जाने का परामर्श तो देते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर ध्यान नहीं है। जब दो वर्ष से जांच ही नहीं हुई, तो यह कैसे उम्मीद की जा सकती है कि जो पानी मरीजों को पीने के लिए मिल रहा, वह शुद्ध है या नहीं। कहा कि न तो शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा और न ही आग से निपटने के लिए ही पानी की बेहतर व्यवस्था जिला अस्पताल में है।
भेजा गया है पत्र
जिला अस्पताल में पानी की शुद्धता व गुणवत्ता की जांच के लिए जल निगम को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि टीम जल्द ही यहां पहुंचकर जांच करेगी। फिर से निगम को पत्र भेजा जा रहा है। -डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस