सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर उफान पर है। नदी का पानी खतरे के निशान से सिर्फ 13 सेमी नीचे रह गया है। यह जल स्तर इस वर्ष का अब तक का सबसे उच्चतम जलस्तर है। नदी का जलस्तर प्रति घंटे एक सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा है। अनुमान लगाया जा रहा कि बुधवार देर रात नदी का जलस्तर पानी चेतावनी बिंदु को पार कर सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है।
यहां तैनात कर्मचारियों को ड्यूटी पर मुस्तैद रहने की हिदायत दी है। उधर जिला मुख्यालय पर डीएम अखिलेश सिंह ने अधीनस्थों के साथ बैठक कर हालात का जायजा भी लिया और बचाव के सभी प्रबमध करने के निर्देश दिए है। मालूम हो कि गत एक सप्ताह से सरयू नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव के क्रम जारी है। मंगलवार देर रात से एक बार फिर से जलस्तर में वृद्धि होने लगी।
1 सेमी प्रति घंटा जलस्तर में वृद्धि दर्ज हुई। नतीजा यह रहा कि बुधवार शाम 4 बजे जलस्तर चेतावनी के लाल निशान से महज 13 सेमी ही नीचे रह गया, जो कि अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। जिस प्रकार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है, उसे देखते हुए अनुमान है कि बुधवार देर रात तक जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाएगा।
जलस्तर में एक बार फिर से हो रही वृद्धि के चलते माझा क्षेत्र के लोगों में चिंता व्याप्त हो गई। गांव में बाढ़ का पानी घुसने की संभावना को देखते हुए कुछ गांव के ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी में लग गए हैं। उधर प्रशासन ने भी बाढ़ की संभावना को देखते हुए गावों में तैनात संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया है।
इस संबंध में बुधवार को डीएम अखिलेश सिंह ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। साथ ही आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कहा कि जिन बाढ़ चौकियों को चिंहित किया गया है, वहां सभी आवश्यक सुविधाएं समय रहते उपलब्ध करा दी जाएं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरयू के जलस्तर में हो रहे उतार चढ़ाव ने निकटवर्ती माझा क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।
प्रशासन ने भी बढ़ से निपटने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी कर दिए थे। सोमवार को जलस्तर स्थिर रहा जबकि मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 50 सेमी नीचे चला गया था। इससे निकटवर्ती गावों माझा उलटहवा, माझा अवसानपुर, करमपुर बरसावां, माझा कम्हरिया समेत एक दर्जन से अधिक गावों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। इस बीच मंगलवार देर रात से जलस्तर में बृद्धि से तटवर्ती गांवों के लोग सहम गए हैं। वे पालयान की तैयारी करने लगे हैं।