अंबेडकरनगर। जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार अपराह्न तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश व ओलावृष्टि से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सड़कें, गलियां व घरों की छतों पर सफेद चादर सी बिछ गई। करीब 15 मिनट तक हुई ओलावृष्टि के दौरान सड़कें सूनसान हो गईं। बाइक सवार चालक जहां-तहां बाइक छोड़कर सिर छिपाने के लिए इधर-उधर दुबक गए। बारिश व ओलावृष्टि ने फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया। कृषि विभाग के मुताबिक, अब तक फसलों का करीब 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। गेहूं, सरसों, चना, मटर आदि फसलें खेतों में धराशायी हो गईं। चना-मटर व सरसों के फल जहां टूट गए, वहीं गेहूं की बालियां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। खेतों में धराशाई हुई फसलों को देख संबंधित किसानों के चेहरे पर दर्द छलक उठा। उनका कहना था कि बदले मौसम ने फसलों को बुरी तरह चौपट कर दिया है। इसकी भरपाई अब नामुमकिन है।
पिछले कुछ दिनों से रुक रुककर तेज हवा व गरज चमक के साथ हो रही बारिश का सिलसिला गुरुवार व शुक्रवार को भी जारी रहा। गुरुवार रात गरज चमक के साथ हुई बारिश के बाद उम्मीद थी कि शुक्रवार को मौसम साफ होगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार को मौसम ने ऐसा रंग दिखाया, जिसकी शायद ही किसी को उम्मीद थी। दोपहर 1 बजे करीब पहले जिले के कई क्षेत्रों में जहां झमाझम बारिश हुई, वहीं कुछ क्षेत्रों में बूंदाबांदी हुई। इसके बाद भी काले घने बादल उमड़ घुमड़ रहे थे।
अपराह्न होते होते पहले तो बूंदाबांदी हुई, इसके बाद ओला गिरना शुरू हो गया। शुरूआत में लगभग पांच मिनट तक छोटे-छोटे ओले गिरकर रुक गए। कुछ देर बाद एक बार फिर से ओला गिरना प्रारंभ हो गया। इस बार इनका आकार बढने लगा। लगभग दस मिनट तक ओलों की बारिश होती रही। सड़कें, गलियों व घरों की छते सफेद चादर से ढक गईं। जितनी देर ओलावृष्टि हुई, उतनी देर सड़कें सुनसान हो गईं। जो जहां था, वहीं ठहर गया। बाइक व साइकिल चालक जहां तहां वाहन छोड़कर इधर उधर दुबक गए।
अकबरपुर नगर की 60 वर्षीय फूलकुमारी व 65 वर्षीय जगरानी ने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इस प्रकार की ओलावृष्टि नहीं देखी थी। पूर्व में जब भी ओला गिरता था, तो छोटे छोटे ओले ही गिरते थे। वह भी कुछ ही देर तक गिरते थे। शुक्रवार को न सिर्फ बड़े बड़े ओले गिरे, बल्कि अधिक समय तक गिरे। लगभग 80 वर्षीय हसन रजा ने कहा कि जिस प्रकार से शुक्रवार अपराह्न ओले गिर रहे थे, उसे देखकर वे अचंभित रह गए। लगभग 15 मिनट तक बड़े बड़े ओले गिरे। ऐसा उन्होंने पहली बार देखा है। कहा कि ऊपरवाला न जाने क्या दिखाना चाहता है।
अकबरपुर के किसान मंगल वर्मा व रामतीरथ ने कहा कि बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना व मटर की फसल को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई होना अत्यंत मुश्किल है। शुक्रवार को हुए ओलावृष्ट ने फसलों को तगड़ी चपत लगाई है। रामगढ़ के रामजीत, चांदपुर के उमापति, अन्नावां के रामउजागिर ने कहा कि मौसम की मार से उभर पाना बहुत मुश्किल है। सभी फसलें लगभग चौपट हो चुकी हैं। मटर, सरसों व चने के दाने ओलावृष्टि से बिखर गए, जबकि गेहूं की बाली भी क्षतिग्रस्त हो गई। जो फसल खेत में धराशायी हुई है, उसमें उपज होना मुश्किल है। किसान दिलीप कुमार व सालिकराम ने कहा कि मौसम की ऐसी मार उन्होंने पहली बार देखी है। बारिश व ओलावृष्टि ने फसलों को जो नुकसान पहुंचाया है, उससे किसानों को तगड़ी आर्थिक चपत लगी है।
उपकृषि निदेशक रामदत्त बागला ने बताया कि जिले में 1 लाख 35 हजार 792 हेक्टेअर क्षेत्रफल में जौ, गेहूं, मक्का, चना, मटर, सरसों, मंसूर, तोरिया व अलसी की बुआई की गई है। बीते दिनों हुई बारिश में अकबरपुर विकास खण्ड में 10 प्रतिशत, कटेहरी में 20, भीटी में 20, टांडा में 12, बसखारी में 12, जलालपुर में 12, भियांव में 15 व जहांगीरगंज विकास खंड में 15 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ था। गुरुवार रात के साथ ही शुक्रवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि में औसतन लगभग 10 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ। ऐसे में अब तक हुई बारिश व ओलावृष्टि से लगभग 30 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।
बीते कुछ दिनों से रुक रुककर हुई बारिश तथा शुक्रवार को बारिश व ओलावृष्टि ने ईंट भट्ठा व्यवसाय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भट्ठा व्यवसाई संदीप वर्मा ने कहा कि बीते कुछ दिनों से रुक रुककर हो रही बारिश से ज्यादातर भट्ठों में अभी आग नहीं लगाई जा सकी है। कारण यह कि बारिश के चलते कच्चे ईंट नष्ट हो गए हैं। भट्ठा व्यवसायी अमित वर्मा व पंकज ने कहा कि जो भट्ठे संचालित हुए हैं, उनके संचालन में डेढ़ गुना खर्च बढ़ गया है। पहले जहां 40 टन कोयले की खपत होती थी, वहीं बारिश के चलते उत्पन्न हुई नमी के चलते 60 से 65 टन कोयला लग रहा है। इससे ईंट के दाम में वृद्धि होना स्वाभाविक है।