अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में मंगलवार को मरीजों की भीड़ के बीच व्यवस्थाएं पटरी से उतरी दिखीं। वार्ड से ओपीडी परिसर में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर पर लाने व ले जाने के लिए वॉर्ड बॉय नहीं मिले। ओपीडी परिसर में व्हीलचेयर का संकट बना रहा। कुछ मरीजों को व्हील चेयर मिलीं तो कुछ को तीमारदार कंधे के सहारे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। भीड़ के चलते परचा से लेकर दवा काउंटरों पर लगी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को मरीजों की भारी भीड़ रही। करीब 1354 नए परचे बनाए गए। मरीजोंं को परचा बनवाने से लेकर दवा पाने तक लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। मरीजों को दिखाने के लिए चिकित्सकों की ओपीडी के बाहर लंबा इंतजार करना पड़ा। सबसे ज्यादा मरीज बुखार से पीड़ित रहे। इन्हें जांच कराने से लेकर दवा पाने के लिए दवा वितरण कक्ष, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और पैथाेलॉजी के बाहर लाइनें लगानी पड़ीं। मंगलवार को ओपीडी 1354 मरीजों का उपचार किया गया।
नहीं मिली व्हीलचेयर
अकबरपुर निवासी विनय कुमार अपने पिता हरिनाथ को दिखाने जिला अस्पताल आए थे। उन्हें पैरालिसिस होने के कारण चलने में दिक्कत होती है। व्हील चेयर न मिलने पर पिता को कंधे के सहारे लेकर चिकित्सक के कक्ष तक ले गए। भीड़ से परेशानी भी हुई।
बेटे ने खींचा स्ट्रेचर
कटेहरी के देवराजपुर गांव में रहने मोतीलाल तीन दिनों से अस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं। मंगलवार को इन्हें ओपीडी में फिजीशियन को दिखाना था। काफी मशक्कत के बाद स्ट्रेचर तो मिला, लेकिन वार्ड बॉय न होने के कारण इनके बेटे को ही स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ा।
बेटे ने खींचा व्हीलचेयर
टांडा के रहने उबैद भी बीमारी के कारण नहीं चल पा रहे थे। इनको डॉक्टर को दिखाने के लिए बेटा साथ आया था। काफी खोजने के बाद व्हीलचेयर तो मिल गया, लेकिन इसे खुद ही खींचकर ओपीडी तक ले जाना पड़ा।
आधे घंटे बाद बना परचा
हजपुरा के रहने विकास ने बताया कि उन्हें बुखार आ रहा है। सुबह 10 बजे पहुंचने के बाद परचा काउंटर पर लंबी कतार लगी थी। करीब आधे घंटे के बाद परचा बन सका।
भीड़ के कारण दवा मिलने में हुई देरी
अकबरपुर निवासी सालिकराम ने बताया कि उनकी पत्नी को बुखार आया है। डॉक्टर को किसी तरह दिखा दिया, लेकिन दवा काउंटर पर भीड़ अधिक होने के कारण इंतजार करना पड़ा।
जिला अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के साथ वार्ड बॉय की संख्या पर्याप्त है। इनकी ड्यूटी भी अलग-अलग स्थानों पर रहती है। किसी की तैनाती चिकित्सक की ओपीडी में तो किसी की वार्ड में होती है। ऐसे में हर जगह वह नहीं मिल सकते। मामले को दिखवाया जाएगा।
डॉ. पीएन यादव, सीएमएस