अंबेडकरनगर। स्टाफ की कमी से कोरोना काल में पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल को मिले दस वेंटिलेटर महज शोपीस बने हैं। वेंटिलेटर का संचालन न होने से अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गंभीर मरीजों को दूसरी जगह रेफर करना पड़ रहा है। करीब ढाई साल पहले जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में लगे वेंटिलेटर को अब भी संचालित करने के लिए मैन पॉवर का इंतजार है।
गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल को दस वेंटिलेटर तो उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन इसके संचालन के लिए स्टाफ की तैनाती नहीं की गई। इस संबंध में जिला अस्पताल प्रशासन कई बार स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजकर स्टाफ की मांग भी कर चुका है। इसके बावजूद स्टाफ की तैनाती न होने से गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित होने वाले यह वेंटिलेटर बीते ढाई सालों से निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं।
इसके चलते गंभीर रोगियों को प्राथमिक इलाज के बाद मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर या फिर लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है। इससे मरीजों के साथ तीमारदारों को भी परेशानी उठाना पड़ रही है। ऐसे में कई बार तो गंभीर मरीज लखनऊ पहुंचने से पहले ही दम तक तोड़ देते हैं।
लोकार्पण बाद भी ट्रॉमा विंग का संचालन नहीं
जिला अस्पताल परिसर में लाखों रुपये की लागत से ट्रॉमा विंग का निर्माण व लोकार्पण भी हो चुका है। इसके बावजूद स्टाफ न होने से इसका संचालन भी नहीं हो पा रहा है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति वेंटिलेटर यूनिट की भी है। यदि स्टाफ की तैनाती कर ट्रॉमा विंग व वेंटिलेटर का संचालन शुरू हो जाए तो इसका सीधा फायदा गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा मुहैया कराने में होगा।
निदेशालय को भेजा पत्र
पीएम केयर फंड से मिले सभी वेंटिलेटरों को सुरक्षित रखा गया है। इसके संचालन के लिए स्टाफ की जरूरत है। इस संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। स्टाफ मिलते ही संचालन शुरू हो जाएगा। -डॉ.ओमप्रकाश, सीएमएस