अंबेडकरनगर। कुत्तों से सावधान रहें। यदि कुत्ते ने काट लिया, तो इंजेक्शन के लिए परेशान होना पड़ सकता है। मौजूदा समय में पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो चुका है। ऐसे में इस वैक्सीन के लिए एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने से निजी मेडिकल स्टोर संचालक मनमानी कर रहे हैं। निर्धारित दाम से अधिक राशि लेकर इंजेक्शन की बिक्री की जा रही है। इसकी शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों से भी की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी का दावा तो बढ़ चढ़कर किया जा रहा, लेकिन मररीजों के लिए सरकारी अस्पताल समुचित सुविधाओं का टोटा सभी दावों को खोखला साबित कर रहा है। पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक में मरीजों को समुचित इलाज नहीं सुनिश्चित हो पा रहा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में जिले के सभी सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन का टोटा बना हुआ है। पीएचसी व सीएचसी में तो बीते एक पखवारे से वैक्सीन नहीं है, तो जिला अस्पताल में भी बीते एक सप्ताह से इंजेक्शन समाप्त है।
नतीजा यह रहा कि इंजेक्शन के लिए सरकारी अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को मायूस होकर लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। गुरुवार को इंजेक्शन के लिए जिला अस्पताल में 35 से अधिक पीड़ित एआरवी लगवाने को पहुंचे थे। उन्हें बताया गया कि अभी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों से आए पीड़ितों को मायूस होकर वापस लौटने को मजबूर होना पड़ा।
सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने से मेडिकल स्टोर संचालकों की बल्ले बल्ले हो गई है। जिले के कुछ क्षेत्रों में तो निर्धारित रेट से अधिक राशि लिए जाने की शिकायत सामने आ रही है। आरोप है कि मौजूदा समय में ज्यादातर मेडिकल स्टोर संचालक 500 से 600 रुपये में इंजेक्शन की बिक्री कर रहे हैं, जबकि इसका वास्तविक दाम साढ़े तीन सौ लगभग है।
इंजेक्शन के लिए जिला अस्पताल पहुंचे बेवाना के रामअवतार व सम्मनपुर के राधेश्याम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बीते एक सप्ताह से जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है, लेकिन जिम्मेदार लोगों को इसकी सुध नहीं है। प्रतिदिन इंजेक्शन के लिए आने वाले पीड़ितों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। कटेहरी के इमाम अली व टांडा के जगदीश ने कहा कि न तो सीएचसी में इंजेक्शन है और न ही जिला अस्पताल में। सबसे अधिक मुश्किल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को हो रही है। उन्हें अधिक दाम पर मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है।
एंटी रैबीज इंजेक्शन के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही उपलब्ध होने की उम्मीद है। - डॉ. अशोक कुमार सीएमओ