महंगाई की मार का सीधा असर 26 सितंबर से शुरू होने वाली दुर्गा पूजा के आयोजनों पर भी दिखेगा। निर्माण लागत में हुई बढ़ोत्तरी के कारण दुर्गा पंडालों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं की कीमत में इस बार 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है। बीते वर्ष स्थापना के लिए जो देवी प्रतिमा 10 हजार में मिली थी उसके लिए इस बार 13 हजार का खर्च करना पड़ेगा।
प्रतिमा निर्माण में लगने वाली सामग्रियों के दाम में हुई वृद्धि का खामियाजा इसके निर्माण से जुड़े कारीगरों के साथ ही दुर्गा पूजा के आयोजन से जुड़ी समितियों को भी उठाना पड़ेगा। मूर्ति बनाने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी इसके निर्माण में लगने वाली पांच प्रकार की मिट्टी न मिल पाने के कारण हो रही है।
कोविड काल के कारण दो साल बाद शारदीय नवरात्र का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाए जाने की तैयारी जिले में शुरू हो गयी है। इसके तहत एक तरफ जहां विभिन्न पूजा समितियों द्वारा भव्य पूजा पंडाल के निर्माण का खाका खींचा जा रहा है दूसरी तरफ कारीगर भी मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूप की प्रतिमाओं के निर्माण में तेजी से जुटे हैं।
विगत वर्ष की तुलना में इस बार देवी प्रतिमा के निर्माण में लगने वाली सामग्रियों की कीमत 30 प्रतिशत तक बढ़ गयी है। इससे देवी प्रतिमाओं के निर्माण कार्य से जुटे कारीगरों को महंगाई के कारण इस बार तमाम तरह की आर्थिक दुश्वारियां भी उठानी पड़ रही है। इसका सीधा प्रभाव दुर्गा पंडालों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं की बिक्री पर भी पड़ेगा।
अकबरपुर दोस्तपुर मार्ग स्थित गौहन्ना के निकट प्रतिमाओं के निर्माण में लगे आर्यशक्ति मूर्ति केंद्र के विपिन कुमार ने बताया कि देवी प्रतिमाओं की कीमत में इस बार बीते वर्ष के मुकाबले 20 से 30 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। बीते वर्ष दो फिट की जो पांच प्रतिमाएं चार हजार में बिकी थीं वह इस बार 6 हजार में और 11 फिट की प्रतिमाएं 12 से 13 हजार तक में बिकेगी। इसमें मां दुर्गा की प्रतिमा के अलावा लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय व सरस्वती की प्रतिमा शामिल है। 11 फिट से ऊंची प्रतिमाओं का निर्माण सिर्फ आर्डर पर ही होगा, इनके निर्माण का रेट पहले से तय नहीं होता है।
महंगी निर्माण सामग्री से बढ़ी लागत
प्रतिमा निर्माण के कार्य से जुड़े कारीगर नितिन कुमार ने बताया कि मूर्ति निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के दामों में होने वाली वृद्धि के कारण ही इनकी निर्माण लागत 20 से 30 फीसदी तक बढ़ी है। प्रतिमा निर्माण में विशेष किस्म के बांस का प्रयोग किया जाता है। यह बांस पहले में 120 रुपया में एक पेड़ी मिलता था जो इस बार बढ़कर दो सौ रुपया पेड़ी में मिल रहा है। मूर्ति बनाने में देसी मिट्टी के साथ ही पांच अलग अलग प्रकार की मिट्टी का प्रयोग होता है। देसी मिट्टी तो आसानी से मिल जाती है लेकिन अन्य मिट्टी जुटाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ती है। सुतली व पुआल के दाम भी विगत वर्ष की तुलना में बढ़े हैं। इसके साथ मूर्तियों की रंगाई में इस्तेमाल होने वाले पेंट के साथ ही सजाने में इस्तेमाल होने वाले साजो समान व कपड़ों के दामों में भी काफी वृद्धि हुई है।
समितियों को उठाना पड़ेगा ज्यादा खर्च
दुर्गा प्रतिमाओं में लगने वाली सामग्रियों के दाम बढने का सीधा असर प्रतिमाओं के दाम पर दिखने लगा है। ऐसे में महंगी देवी प्रतिमाएं खरीदने के कारण इस बार पूजा समितियों को ज्यादा जेब ढीली करना पड़ेगी। अकबरपुर नगर के मीरानपुर में बाल दुर्गा पूजा समिति से जुड़े रामजी व गोलू जायसवाल ने कहा कि विगत वर्ष जो प्रतिमा आठ हजार की मिली थी, वह इस बार 11 हजार में बुक हुई है। नव दुर्गा पूजा समिति के राम अवतार ने बताया कि बीते वर्ष चार हजार में पांच प्रतिमा मिली थी, लेकिन इस बार वहीं प्रतिमाएं छह हजार में बुक हुई हैं। नवज्योति दुर्गा पूजा समिति रगड़गंज से जुड़े अभिषेक ने कहा कि विगत वर्ष जो प्रतिमा छह हजार रुपए में मिली थी, वह इस बार साढ़े नौ हजार रुपये में बुक हुई है।