अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई यूपी बोर्ड की परीक्षाएं सोमवार को संपन्न हो गईं। लगभग एक माह तक चलने वाली परीक्षा अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ गई। नकलविहीन परीक्षा कराने को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा किए गए तमाम दावे नकल माफिया के मजबूत नेटवर्क के चलते खोखले ही साबित हुए।
गौरतलब है कि 9 मार्च से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के बीच प्रारंभ हुई थीं। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए सभी सामान्य परीक्षा केंद्रों पर दो-दो स्टेटिक मजिस्ट्रेट जबकि संवेदनशील व अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट के अलावा दो जिलास्तरीय अधिकारियों की तैनाती की गई थी।
शिक्षा विभाग ने पांच सचल दल का भी गठन किया था। शुरुआती दिनों से ही शिक्षा विभाग के दावे हवा-हवाई साबित होने लगे थे। शुरू में न तो सभी सचल दल सड़क पर उतर सके और न ही सभी स्टेटिक मजिस्ट्रेट संबंधित परीक्षा केंद्रों पर पहुंच सके।
नकल माफिया शिक्षा विभाग की तैयारियों पर कितना हावी रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षा केंद्रों पर सचल दल के पहुंचने से पहले ही इसकी जानकारी वहां पहुंच जा रही थी। नतीजा यह होता कि जब सचल दल परीक्षा केंद्र पहुंचता, तो वहां सबकुछ ओके नजर आता।
नकल रोकने को लेकर शिक्षा विभाग को कितनी सफलता मिली, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरी परीक्षा में मात्र पांच नकलची ही हत्थे चढ़े जबकि 12 से अधिक कक्ष निरीक्षक हटाए जा सके। उधर, अंतिम दिन सोमवार को प्रथम पाली में इंटरमीडिएट भूगोल द्वितीय प्रश्रपत्र की परीक्षा में कुल 12 हजार 568 परीक्षार्थियों को भाग लेना था लेकिन 11 हजार 106 परीक्षार्थी ही उपस्थित रहे जबकि एक हजार 462 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
द्वितीय पाली में व्यवसायिक परीक्षा में 548 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 534 परीक्षार्थी उपस्थित रहे जबकि 14 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। डीआईओएस डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि परीक्षा पूरी कुशलता के साथ संपन्न हुई है।