अंबेडकरनगर। शहर के रगड़गंज में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को प्रवाचक पंडित रवि कुमार उपाध्याय ने धर्म, संस्कार और अच्छे आचरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत केवल कथा नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्ग है।
मनुष्य का जीवन तभी सफल होता है जब उसके विचार, व्यवहार और कर्म श्रेष्ठ हों। भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं है। सच्ची भक्ति वह है जो व्यक्ति के स्वभाव और आचरण में दिखाई दे। सत्य, सेवा, संयम और करुणा को अपनाने वाला व्यक्ति समाज में सम्मान प्राप्त करता है।
अच्छे संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पहचान हैं। सच्ची भक्ति व्यवहार में दिखाई देती है। अहंकार और लोभ से हमेशा दूरी रखनी चाहिए। सत्य और सेवा का मार्ग अंत में सम्मान दिलाता है। धर्म का पालन केवल मंदिर में नहीं बल्कि दैनिक जीवन में भी होना चाहिए।
लोभ, क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसे दोष मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी हैं। इस दौरान त्रिलोकी नारायण, राकेश कुमार, राजकुमार, गंगाराम जायसवाल, हरिराम जायसवाल, अनिल सोनी, अनिल जायसवाल, राजेश जायसवाल व अन्य उपस्थित रहे। संवाद