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पर्यावरण बेहतरी के साथ मजबूत होगी धार्मिक भावना

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पर्यावरणअंबेडकरनगर। 100 वर्ष से ऊपर पेड़ों को हेरिटेज के रूप में संरक्षित करने का राज्य सरकार का फैसला लोगों को खूब रास आ रहा है। लोगों ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि निश्चित तौर पर इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह ऐसे पेड़ हैं जो दशकों पुराने हैं। कई जगह ऐसे पेड़ों को लेकर लोगों के बीच धार्मिक आस्था भी है।
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इसका सबसे बड़ा प्रमाण शिवबाबा स्थित बरगद का विशालकाय पेड़ है। यहां हर सोमवार व शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। श्रद्धालु पेड़ की परिक्रमा कर विशेष पूजन-अर्चन कर माथा टेकते हैं। मान्यता है कि हृदय से मांगी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इस तरह के पेड़ों को हेरिटेज के तौर पर संरक्षित किया जाए। इससे आम लोगों की उम्मीद बढ़ी है। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ पर्यावरण बेहतर होगा बल्कि लोगों की भावनाओं का भी सम्मान होगा।
महरुआ थाना क्षेत्र के लोकनाथपुर गांव के निकट स्थित है विशालकाय आम का पेड़। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 100 वर्ष पुराने आम के पेड़ के निकट सौंदर्यीकरण की जरूरत है। गांव के बुजर्गों की मान्यता है कि इस पेड़ के आसपास यदि मार्ग दुर्घटना होती है, तो इसमें घायल होने वाले लोगों की प्राय: मौत हो जाती है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यदि मार्ग दुर्घटना में मौत की जानकारी ग्रामीणों को होती है, तो उनका पहला सवाल रहता है कि लोकनाथपुर गांव के बाहर स्थित आम के पेड़ के निकट तो घटना नहीं हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि लोग जब पेड़ के निकट पहुंचते हैं, तो वे अक्सर वाहन की गति काफी धीमी कर लेते हैं। ग्रामीणों के अनुसार पेड़ को संरक्षित कर सौंदर्यीकरण किया जाए तो ये मान्यता बदलेंगी।
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जलालपुर तहसील अन्तर्गत पारा गांव के बाहर नाले के निकट स्थित है बरगद का विशालकाय पेड़। बताया जाता है कि पेड़ लगभग 200 वर्ष पुराना है। गांव के बुजुर्ग बनवारीलाल बताते हैं कि इस पेड़ के बारे में एक पंक्ति प्रसिद्ध है कि पारा के नारा का बरगद है साक्षी, खसरा में बेबाक, कचेहरी में है बाकी। बताया जाता है कि एक अमीन को गांव के ही कुछ लोगों ने मालगुजारी माफ कराने के लिए इसी बरगद के पेड़ के नीचे बांधकर पिटाई कर दी थी। अमीन ने कागज पर मालगुजारी माफ कर दी, लेकिन कचेहरी में बाकी रह गई। इन्हीं सब मान्यताओं को लेकर यह पेड़ आस्था का सबब बना हुआ है। बताया कि बरगद के निकट प्रत्येक शिवरात्रि में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मेले के दिन विशाल भण्डारे का भी आयोजन होता है।
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