अंबेडकरनगर। पंजाब में फंसे लगभग 12 सौ मजदूरों को लेकर विशेष श्रमिक स्पेशल ट्रेन शनिवार अपरान्ह तीन बजे करीब अकबरपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पुलिस प्रशासन के अधिकारी पहले से ही मुस्तैद थे। सभी श्रमिकों को नाश्ता उपलब्ध कराए जाने के बाद उन्हें सरकारी बस से खेल स्टेडियम ले जाया गया, जहां उनकी विधिवत स्क्रीनिंग कराई गई। स्टेडियम में मजदूरों को लंच पैकट भी उपलब्ध कराया गया। स्क्रीनिंग के बाद सामान्य पाए जाने पर मजदूरों को सात दिन के होम क्वारंटीन के लिए घर भेज दिया गया। इसमें अंबेडकरनगर जनपद के अलावा आसपास के जनपदों से जुड़े मजदूर शामिल थे।
कोरोना वायरस के चलते पंजाब में फंसे मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए सरकार की विशेष पहल के बाद विशेष ट्रेनों की रवानगी शुरू हुई है। इसी क्रम में जालंधर से 1188 श्रमिकों को लेकर विशेष श्रमिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन शनिवार अपरान्ह तीन बजे करीब अकबरपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन के आने से पहले ही आरपीएफ, जीआरपी, सिविल पुलिस, महिला पुलिस तथा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मोर्चा सम्हाल लिया था। डीएम राकेश कुमार मिश्र, एसपी आलोक प्रियदर्शी, सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव, एडीएम डॉ. पंकज वर्मा व एएसपी अवनीश कुमार मिश्र व्यवस्था का जायजा लेने के लिए स्टेशन पर ही मौजूद थे।
ट्रेन को प्लेटफार्म नंबर एक पर रोका गया। ट्रेन पहुंचने के बाद मजदूरों को उनके कोच में ही बिस्किट, पानी व दूध आदि उपलब्ध कराया गया। किसी प्रकार की अफरातफरी की स्थिति न बनने पाए, इसके लिए प्रशासन ने पहले से ही रिहर्सल करा रखा था। ट्रेन आने के पहले ही स्टेशन पर अलग अलग जिम्मेदारियां सौंपने के साथ ही अधिकारियों ने उसका रिहर्सल भी कराया था। नतीजा यह हुआ कि ट्रेन पहुंचने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए मजदूरों को कोच से उतारने का सिलसिला लगभग आधे घंटे बाद शुरू हुआ।
स्टेशन के बाहर पहले से मौजूद राज्य परिवहन निगम की 50 बसों के जरिए मजदूरों को राजकीय खेल स्टेडियम ले जाया गया। वहां चिकित्सकों व कर्मचारियों की टीम ने उनकी स्क्रीनिंग की। यह दौर घंटों चलता रहा। मजदूरों को स्टेडियम में लंच पैकेट भी उपलब्ध कराया गया। इसके बाद जांच में सामान्य पाए गए मजदूरों को बसों के जरिए उनके घरों की तरफ भेज दिया गया।
पंजाब में फंसे मजदूर व उनके परिवारीजन शनिवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अकबरपुर पहुंचे तो उनके चेहरे खिल उठे। अंबेडकरनगर के अलावा आसपास जिले के यात्रियों में इस बात की खुशी थी कि अब चंद घंटे के भीतर वे अपने परिवारीजनों के बीच होंगे। जहां न कोई संकट होगा और न ही किसी तरह ज्यादा बंदिश। ट्रेन से पहुंचे यात्री त्रिमुहानी निवासी इन्द्रभान ने बताया कि जब ट्रेन की संभावना नहीं थी तो पैदल या साइकिल से चलने का मन बनाए थे, लेकिन ट्रेन चलने से तमाम कष्ट दूर हो गए।
टिकट न लगने से खुश इन्द्रभान ने बताया कि ट्रेन में खाने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई थी। महरुआ निवासी बृजेश ने कहा कि ट्रेन से उतरते ही अपने जनपद पहुंचकर ऐसे लगा जैसे नई जिंदगी मिल गई हो। लॉकडाउन में पंजाब में मकान मालिक ने किराए के लिए परेशान कर दिया था तो वहीं राशन का भी संकट हो गया था। घर वालों ने बैंक खाते में पैसा भेजा था। सिर्फ चार सौ रुपए बचा था। जहांगीरगंज निवासी सुमन अपने पति के साथ अकबरपुर पहुंचकर काफी खुश दिखीं। टे्रन चलाने के निर्णय की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसा न होता तो पंजाब में बगैर काम के रह पाना अब संभव नहीं रह गया था। इन सबके अलावा कई अन्य मजदूरों ने भी इसी तरह की खुशी जताई। कहा कि देश के जिन हिस्सों में भी मजदूर फंसे पड़े हैं, उन्हें इसी तरह विशेष मुहिम के जरिए जल्द से जल्द वापस उनके घर तक पहुंचाना चाहिए।
अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर बच्चों के लिए दूध उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था को देख वे महिलाएं खुश हो गईं, जो अपने बच्चों को साथ लेकर यात्रा कर रहीं थीं। बसखारी निवासी खुशबू शनिवार को पति रामकुमार के साथ अकबरपुर पहुंची तो उनके साथ दुधमुंहा पुत्र भी था। स्टेशन पर प्रशासन द्वारा दूध उपलब्ध कराए जाने से वे खुश हो गईं। कहा कि यह निर्णय अत्यन्त ही जरूरी था। इल्फिातगंज निवासी स्नेहलता भी दुधमुंहे बच्चे व पति बृजभूषण के साथ स्टेशन पर ट्रेन से उतरीं तो वहां दूध मिलता देख खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि इसी तरह की संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए।