कार तक शराब पहुंचाने के विवाद में ग्रामीणों से हुई भिड़ंत मामले को लेकर महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर प्रशासन ने अत्यंत सख्त कदम उठाते हुए तीन संविदा चिकित्सकों को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही पांच एमबीबीएस छात्रों को निलंबित करते हुए उनका हॉस्टल में प्रवेश रोक दिया गया है।
इसके अलावा तीन सेमेस्टर के लगभग दो सौ छात्रों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि किसी भी दशा में अनुशासन के साथ समझौता नहीं होगा। ग्रामीणों के साथ मारपीट व हंगामे की कई घटनाओं के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया है।
दरअसल मंगलवार रात मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज के पास स्थित शराब सेल्समैन सद्दरपुर निवासी राजेश वर्मा (38) की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी थी क्योंकि उसने दुकान से बाहर निकलकर कार तक शराब पहुंचाने से मना कर दिया था। इसके बाद छात्रों ने कॉलेज से साथियों को बुलाकर जमकर तोड़फोड़ व मारपीट की थी।
इसके बाद ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभाला और उन्होंने भी छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। मेडिकल कॉलेज के अंदर तक भी आक्रोशित ग्रामीण पहुंच गए थे। मामले में दोनों तरफ से अलीगंज थाने में केस दर्ज कराया गया था। प्रकरण में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डॉ. सुजीत राय के नेतृत्व में डॉ. अरविंद, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ. मुकेश राना व डॉ. वीरेंद्र यादव की पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।
जांच टीम ने एक दिन पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीन संविदा चिकित्सकों डॉ. अंकित जायसवाल, डॉ. ऋषि व डॉ. अंकुर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही एमबीबीएस के पांच छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके हॉस्टल प्रयोग पर रोक लगा दी गई।
सभी निलंबित छात्रों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा वर्ष 2011, वर्ष 2012 व वर्ष 2013 से जुड़े लगभग दो सौ मेडिकल छात्रों पर भी दो-दो हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के इस सख्त कदम से कर्मचारियों व छात्रों में हड़कंप है।
प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। अनुशासन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि ऐसा कोई आचरण न करें जिससे मेडिकल कॉलेज की गरिमा पर कोई असर पड़े।