डेंगू से 48 घंटे के भीतर टांडा व जलालपुर निवासी दो युवक व एक बालिका की मौत हो गई। तीनों का उपचार लखनऊ के निजी चिकित्सालयों में चल रहा था। दो दिन पूर्व ही इन तीनों को परिवारीजनों ने अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया था। गौरतलब है कि इससे पहले भी डेंगू से 10 लोगों की जान जा चुकी है। डेंगू के तेजी से बढ़ते प्रकोप के बाद भी प्रशासन की उदासीनता को लेकर लोगों में रोष है।
जलालपुर नगर के जफरपुर निवासी कौशलेंद्र (40) ने 6 अक्तूबर को खून की जांच कराई तो उसमें डेंगू के लक्षण पाए गए। स्थानीय स्तर पर उपचार के साथ ही वे लखनऊ चले गए। वहां इलाज के दौरान उन्होंने 11 अक्तूबर की रात दम तोड़ दिया। कौशलेंद्र का निधन होते ही परिवार में रोना-पीटना मच गया। परिवार से जुड़े केशवप्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी।
लखनऊ में भर्ती भी कराया गया था लेकिन बचाया नहीं जा सका। उधर, जलालपुर के ही उसमापुर मोहल्ले के रहने वाले रामबिलास उर्फ गुड्डू की 10 वर्षीय पुत्री खुशी उर्फ निराली की बुधवार को लखनऊ के निजी अस्पताल में डेंगू से मौत हो गई। रामबिलास ने बताया कि जिले में कराई गई जांच में जब डेंगू की पुष्टि हुई तो तत्काल बुधवार सुबह वे सब खुशी को लेकर लखनऊ चले गए।
वहां एक अस्पताल में भर्ती भी कराया लेकिन उसी दिन कुछ घंटे बाद उसका निधन हो गया। बालिका की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बालिका की मां ने बताया कि डेंगू के इलाज के लिए ही उसे लखनऊ में भर्ती कराया गया था। उधर, टांडा के मोहल्ला राजघाट निवासी जावेद अख्तर (38) पुत्र हाफिज सरवर की डेंगू से लखनऊ में उपचार के दौरान मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार जावेद अख्तर एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। स्थानीय चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जा रहा था। दो-तीन दिन पूर्व तबियत ज्यादा खराब होने पर परिवारीजनों ने उसे लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया।
वहां जांच में डेंगू के लक्षण पाए गए। मंगलवार दोपहर स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर चिकित्सकों ने आईसीयू में भर्ती किया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के एक पुत्र व एक पुत्री है। सीएमओ डॉ. मोहिबुल्लाह ने बताया कि इन तीनों घटनाओं की जानकारी नहीं है। डेंगू से बचाव को लेकर आवश्यक सुझाव व सतर्कता बरतने की जानकारी लगातार लोगों को दी जा रही है। इसका गंभीरता से सभी को पालन करना चाहिए।