अंबेडकरनगर। टांडा क्षेत्र में वाहन चोरी कर फर्जी कागजात के सहारे बेचने के करीब 16 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पवन कुमार शुक्ला की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। बरामदगी की फर्द की विश्वसनीयता और विवेचना में मिली खामियां फैसले का प्रमुख आधार बनीं।
मामला वर्ष 2010 का है। अभियोजन के अनुसार, 21 अगस्त 2010 को कोचिंग पढ़ने गए एक युवक की मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। मामले में आठ दिसंबर 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने अमरनाथ गुप्ता उर्फ विजय निवासी नाऊसांडा इब्राहिमपुर, अनुज उर्फ प्रदीप कुमार पांडेय निवासी सिधियावा सुबेहा बाराबंकी, सुनील दूबे निवासी संघतिया तिराहा शहजादपुर और आमिर निवासी चिंतौरा टांडा को आरोपी बनाया था। विचारण के दौरान अनुज की मृत्यु होने पर उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपी बाइक चोरी करने के बाद उनके नंबर बदल देते थे। इसके बाद फर्जी पंजीकरण और बीमा संबंधी कागजात तैयार कराकर वाहन बेचते थे। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान कई मोटरसाइकिलें बरामद करने का दावा किया था। सुनील के पास से सात पंजीकरण व बीमा संबंधी कागजात मिलने की बात भी कही गई थी।
अदालत ने पाया कि पुलिस ने चार स्थानों से बरामदगी का दावा किया, लेकिन विवेचक ने केवल दो स्थानों के ही नक्शे नजरी तैयार किए। अमरनाथ गुप्ता के नाऊसांडा स्थित अहाते और यूनुस के घर से कथित बरामदगी के स्थानों का नक्शा नहीं बनाया गया। वहीं, कथित फर्जी दस्तावेजों का आरटीओ कार्यालय और बीमा कंपनियों से सत्यापन कराने के साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए। संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। (संवाद)