अंबेडकरनगर। यूपी मदरसा बोर्ड की ओर से संचालित मुंशी, मौलवी और आलिम की परीक्षाओं में इस बार परीक्षार्थियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल जहां करीब 3000 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, वहीं इस बार केवल 1442 परीक्षार्थियों ने बोर्ड फॉर्म भरा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मदरसा बोर्ड को कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्री देने पर रोक लगाए जाने के बाद यह बदलाव देखा गया है।
मदरसा बोर्ड की ओर से सेकेंड्री स्तर (मुंशी और मौलवी) और सीनियर सेकेंड्री स्तर (आलिम) की परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है। निर्धारित समय तक केवल 1442 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया है।
पिछले साल की तुलना में यह संख्या लगभग आधी रह गई है, जो इस बात को दर्शाता है कि उच्च शिक्षा की डिग्री पर रोक का व्यापक असर पड़ा है। मदरसा बोर्ड की डिग्री पर रोक के कारण उन छात्रों को अपनी शिक्षा का विकल्प चुनने में परेशानी हो रही है, जो कामिल और फाजिल की डिग्री के माध्यम से करियर बनाना चाहते थे । कई छात्रों ने अब अन्य शैक्षणिक संस्थानों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
हालांकि, अभी तक यूपी मदरसा बोर्ड ने परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की है, लेकिन बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के अनुसार, परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मदरसा बोर्ड के परीक्षार्थियों की संख्या में कमी का प्रमुख कारण उच्च शिक्षा की डिग्री पर लगी रोक है। हालांकि, बोर्ड इस बार भी परीक्षा को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण बोर्ड के निर्देशानुसार किया जा रहा है। विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा। -छोटेलाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी