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आंगनबाड़ी केंद्रों से पुष्टाहार का वितरण नहीं होगा

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अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत तीन लाख से अधिक बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए बुरी खबर है। बाल विकास परियोजना के तहत अब उन्हें पुष्टाहार नहीं मिलेगा। लगातार सामने आ रही गड़बडी को देखते हुए शासन ने पुष्टाहार वितरण योजना ही बंद कर दी।
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ऐसे में अब संबंधित बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को पुष्टाहार से वंचित रहना पड़ेगा। बाल विकास परियोजना विभाग के अनुसार दिसंबर से लाभार्थियों को कोटे के माध्यम से कच्चा अनाज उपलब्ध कराए जाने की योजना संचालित होने की संभावना है।
बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से अब पुष्टाहार का लाभ पंजीकृत बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को नहीं मिलेगा। शासन ने इस योजना को पूरी तरह बंद कर दिया है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों से पुष्टाहार के तहत मीठी व नमकीन दलिया उपलब्ध कराई जा रही थी। योजना के बंद हो जाने के चलते अब संबंधित लाभार्थियों को इससे वंचित रहना पड़ेगा।
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गौरतलब है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 2551 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें तीन लाख से अधिक बच्चे, गर्भवती व धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। बाल विकास परियोजना विभाग के अनुसार इन आंगनबाड़ी केंद्रों में छह माह से तीन वर्ष तक के एक लाख 5 हजार बच्चे जबकि तीन वर्ष से छह वर्ष तक के एक लाख 50 हजार बच्चे, 28 हजार गर्भवती व 20 हजार धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। योजना के बंद हो जाने से अब ये लाभार्थी पुष्टाहार से वंचित रह जाएंगे।
योजना के बंद होने से नाराज गर्भवती व धात्री महिलाओं ने कहा कि पुष्टाहार न मिलने से जिले को कुपोषण मुक्त करने की योजना प्रभावित होगी। बच्चों व महिलाओं के हित को देखते हुए इस योजना को बंद नहीं करना चाहिए था। भीटी तहसील क्षेत्र की किरन व शांति देवी ने कहा कि एक तरफ कुपोषण समाप्त करने को लेकर जिम्मेदारों द्वारा आए दिन विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ योजना को ही बंद कर दिया गया। ऐसा होने से जिले को कुपोषण मुक्त किस प्रकार किया जा सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
परियोजना अधिकारी बाल विकास शेषनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों से संचालित पुष्टाहार योजना के बंद किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि नवंबर में आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को पुष्टाहार नहीं मिलेगा। दिसंबर से ऐसे लाभार्थियों को कच्चा अनाज दिए जाने की तैयारी है। स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा कोटे से अनाज लेकर कर पैकिंग की जाएगी। इसके बाद उसे वितरण के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेज दिया जाएगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि पुष्टाहार का वितरण अब आंगनबाड़ी केंद्र से नहीं होगा। दिसंबर से लाभार्थियों को कच्चा अनाज उपलब्ध किए जाने की योजना है। इसके तहत प्रति पात्र एक किग्रा चावल, डेढ़ किग्रा गेहूं, 75 ग्राम दाल व तीन-तीन माह पर दूध व घी दिया जाएगा।
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