अंबेडकरनगर। जिला पंचायत में करोड़ों के काम देने में तो तेजी दिखाई गई, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी काम पूरा कराने की सुध नहीं रही। कई ऐेसे काम जो एक माह में हो जाने थे, वह तीन माह बाद भी या तो अधूरे पड़े हैं या फिर शुरू ही नहीं हो पाए हैं। इनमें कई पिच मार्ग तो कई कार्य इससे इतर भी हैं। सूत्रों का कहना है कि दरअसल पूरा जोर सिर्फ काम देने पर ही रहता है। क्योंकि काम देने के बाद ही कई छिपे हुए लाभ पूरे हो जाया करते हैं। ऐसा ही कुछ जिला पंचायत में भी हुआ।
विकास कार्यों का जिम्मा संभालने वाली जिला पंचायत कई तरह की गड़बड़ी में घिरी हुई है। करीब एक दशक एक ब्लॉक व एक पटल पर कर्मचारियों के जमे रहने के मामले का खुलासा अमर उजाला की ओर से किए जाने के तत्काल बाद प्रशासक बने डीएम राकेश कुमार मिश्र ने अभूतपूर्व परिवर्तन तय करा दिया था। इसकी खूब सराहना भी हुई। बीते दिनों मनमाने ढंग से टेंडर दिए जाने तथा ठंड के मौसम में भी पिच कार्य कराए जाने का मामला भी उजागर हुआ था। अब इस बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है।
वह यह है कि जिला पंचायत ने आननफानन में 23 करोड़ के कार्यों के टेंडर तो निकाल दिए। कार्यों का आवंटन भी कर दिया, लेकिन उसे निर्धारित समय में पूरा कराने की सुध नहीं ली गई। अक्तूबर में 14 करोड़ की लागत से कुल 165 विकास कार्यों के टेंडर किए गए। इसमें पुलिया, सोलिंग, सीसी रोड, नाली व सुलभ शौचालय का निर्माण आदि शामिल था। सभी 165 कार्यों को पूरा किए जाने की अवधि तीन माह निर्धारित की गई। आननफानन में टेंडर करने के साथ ही इन कामों को कई जगह शुरू करा दिया गया तो हालत यह है कि अभी तक तमाम जगह काम शुरू ही नहीं हो सके हैं।
इसी के साथ नौ करोड़ की लागत से 86 कार्य सड़कों की विशेष मरम्मत के टेंडर किए गए। इन सभी 86 कामों को पूरा करने की अवधि बीते अक्तूबर में टेंडर के दौरान एक माह रखी गई। इसके बावजूद साढ़े तीन माह बीतने के बाद भी तमाम काम अभी तक अधूरे पड़े हैं। कई काम तो ऐसे जो शुरू नहीं हो पाए हैं।
उठाए जा रहे सवाल
जिस तेजी के साथ जिला पंचायत में टेंडर किए गए, उतनी ही तेजी से काम पूरा न कराने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि टेंडर इसलिए जल्दी से करा दिए गए, जिससे ठेकेदारों को काम का आवंटन कर जरूरी लाभ हासिल किया जा सके। वह लाभ हासिल करने के बाद काम को निर्धारित अवधि में पूरा कराने की सुध नहीं ली गई। सवाल खड़ा करते हुए अकबरपुर निवासी घनश्याम सिंह व जलालपुर निवासी राधेश्याम तिवारी ने कहा कि जब काम तीन माह बाद ही शुरू कराने थे तो आखिर आननफानन में टेंडर क्यों कराए गए। इसकी जांच होनी चाहिए। कई अन्य नागरिकों ने कहा कि काम शुरू न होने पर अभियंताओं ने संबंधित फर्म को नोटिस देकर काम निरस्त क्यों नहीं कराया। अन्य ठेकेदारों को ऐसे काम का आवंटन करना चाहिए था, जिससे मनमानी रुकती।
पूरे कराए जाएंगे कार्य
जो भी कार्य अधूरे पड़े हैं, उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। ठंड की वजह से कुछ कार्य रुके हैं। उन्हें अब शुरू कराया जा रहा है।
- अजय यादव, अपर मुख्य अधिकार जिला पंचायत