विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टांडा में पिछले लगभग डेढ़ वर्षों से हड्डी रोग विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। टांडा नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब साढ़े चार लाख की आबादी इस केंद्र पर आश्रित है।
सीएचसी टांडा में प्रतिदिन लगभग 300 से 350 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, इनमें से औसतन 20 से 25 मरीज हड्डी टूटने या अन्य ऑर्थोपेडिक समस्याओं से पीड़ित होते हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले यहां तैनात डॉ. राजेश कुमार जायसवाल का गैर जनपद स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद से यहां किसी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई। विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
कई मरीज निराश होकर निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, जहां इलाज अत्यधिक खर्चीला होता है। ग्रामीण अंचल से आने वाले कई मरीज आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं होते हैं कि वे निजी अस्पतालों में इलाज करा सकें। परिणामस्वरूप, अनेक मामलों में मरीजों को अधूरे इलाज या घरेलू उपायों के सहारे वापस लौटना पड़ता है। जिससे उनकी स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।
स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि टांडा सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती की जाए, जिससे आमजन को राहत मिल सके। इस संबंध में सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वर्तमान में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है। केवल जनरल सर्जन का पद स्वीकृत है। पूर्व में यदि किसी चिकित्सक की तैनाती रही होगी तो वह विशेष परिस्थिति में रही होगी।