मलेशिया से लौटने के बाद जहांगीरगंज के रामपुर स्थित घर पर अपनी मां के साथ सत्यम उपाध्याय। स्रो
अंबेडकरनगर। रोजगार के लिए मलेशिया गए जहांगीरगंज के रामपुर निवासी सत्यम उपाध्याय (24) 51 दिन बाद 28 जून को सकुशल अपने घर लौट आए। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है।
मां मिथिलेश कुमारी के अनुसार सत्यम को आठ मई को एजेंट राकेश यादव ने कार चालक की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर मलेशिया भेजा था। इसके लिए टिकट और अन्य खर्च के नाम पर कुल डेढ़ लाख रुपये लिए गए। 1.20 लाख रुपये इंद्रजीत शुक्ला के खाते में जमा कराए गए, जबकि 30 हजार रुपये नकद दिए गए। आरोप है कि मलेशिया पहुंचने पर सत्यम को कार चालक की नौकरी नहीं दी गई। इसके बजाय उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में चायपत्ती तोड़ने के काम में लगा दिया गया। वहां काम की कठिन परिस्थितियों और मानसिक तनाव के बीच उन्होंने अपने परिवार को पूरी जानकारी दी। परिजनों ने एजेंट से संपर्क किया लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
इसके बाद सात जून को परिवार ने सामाजिक कार्यकर्ता सैय्यद आबिद हुसैन से संपर्क किया। उन्होंने भारतीय उच्चायोग मलेशिया, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र और विदेश मंत्रालय को पूरे मामले के बारे में बताया। 26 जून को उन्हें मलेशिया से भारत लाकर कोलकाता पहुंचाया गया था। विभिन्न स्तरों पर समन्वय के बाद सत्यम की स्वदेश वापसी सुनिश्चित हुई।
एजेंटों पर कार्रवाई की मांग
सत्यम उपाध्याय ने आलापुर थाने में शिकायती पत्र देकर विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों के खिलाफ तहरीर देकरकार्रवाई की मांग की है। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले की जांच की जा रही है।