टांडा में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से हनुमानगढ़ी घाट की डूबी सीढि़यां। संवाद
राजेसुल्तानपुर/विद्युतनगर। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से पानी खेतों और नालों के रास्ते गांवों की ओर बढ़ने लगा है। आलापुर और टांडा तहसील क्षेत्रों में करीब 250 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। आलापुर के कई गांवों के बाहरी हिस्सों तक पानी पहुंच गया है, जबकि टांडा क्षेत्र में माझा उल्टहवा के तीन मजरे पानी से घिरकर टापू बन गए हैं।
ग्रामीण घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ मवेशियों के चारे की व्यवस्था में जुट गए हैं। प्रशासन ने भी बाढ़ से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो प्रभावित इलाकों से पलायन की स्थिति बन सकती है। बुधवार को सरयू का जलस्तर 85.55 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 85.56 मीटर से सिर्फ 0.01 मीटर नीचे है।
डीएम ईशा प्रिया ने नदी के पास व निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
जलस्तर बढ़ने से आलापुर के इटौरा ढोलीपुर गांव के पूरब स्थित मांझा क्षेत्र में 100 बीघे से अधिक धान की फसल पानी में डूब गई। आराजी देवारा के संतोष, धर्मेंद्र राधेश्याम व पारस ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी का पानी अब निचले हिस्सों से बंधे के किनारे होते हुए करिया लोनिया का पूरा गांव के तीन तरफ तक पानी पहुंच चुका है। इसी तरह जलस्तर बढ़ा तो हंसू का पूरा व प्रसाद कुर्मी का पूरा तक भी पहुंच में पहुंचने में देर नहीं लगेगी। वही मांझा कम्हरिया के भी कई मजरे इसकी चपेट में आ जाएंगे।
उधर, टांडा क्षेत्र में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति और संवेदनशील हो गई है। सरयू के बढ़ते पानी से उल्टहवा माझा, अवसानपुर, केवटला, डुहियां और महरीपुर समेत कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। टांडा की हनुमानगढ़ी व महादेवा घाट की सभी सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं। उल्टहवा माझा के ग्राम प्रधान शिवप्रसाद ने बताया कि नदी किनारे की 150 बीघा धान और सब्जियों की फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं। जालिम का पूरा, दिलसेन का पूरा और बाबूराम का पूरा पानी से घिर गए हैं। जालिम का पूरा गांव के दक्षिण 15 घरों तक पानी पहुंच गया है। लेखपाल शिवनारायण के अनुसार अभी गांव की सड़क तक पानी नहीं पहुंचा है।