अंबेडकरनगर। रोजगार के लिए इस्राइल गए जिले के युवा धमाकों के बीच जान जोखिम में डालकर जीवन गुजारने को विवश हैं। ईरान से चल रहे युद्ध के दौरान दिन-रात कभी भी मिसाइल हमले का सायरन गूंजते ही सभी को जान बचाने के लिए भवनों के नीचे बने बंकरों में छिपने के लिए भागना पड़ता है। मुश्किल हालात के बावजूद वह चाहकर भी वापस अपने मुल्क व परिवार के पास लौट नहीं पा रहे हैं।
भारत से गया हर कामगार बस यही उम्मीद लगाए हुए है कि जल्द ही हालात पहले की तरह सामान्य हों और उनकी रोजी-रोटी पर मंडरा रहा खतरा दूर जाए। ऐसे विषम हालात में फंसे अपनों के लिए जिले में रहने वाले परिजन भी खासा चिंतित व परेशान हैं। (संवाद)
धमाकों के बीच काम करने की मजबूरी
इस्राइल गए अकबरपुर के गांव रोशनगढ़ निवासी देवानंद ने मोबाइल पर बताया कि वे इस समय तेल अवीव शहर के यहूदा में मौजूद हैं। यहां से दो से ढाई किलोमीटर की दूरी पर काम करने के लिए जाना पड़ता है। ऊपरी मंजिल पर काम करने के दौरान अक्सर मिसाइलों के गोले आसपास ही फटते हैं। ऐसे में सायरन बजते ही सभी लोग बेसमेंट में बने सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर यहीं रुके हैं।
चाहकर भी नहीं लौट पा रहे वापस
अकबरपुर स्थित बेवाना के गांव सिसवां के रहने वाले योगेंद्र शटरिंग का काम करने इस्राइल के रमला शहर गए थे। बताया कि घंटे के हिसाब से पैसे मिलते हैं। घरवालों से जब यहां की स्थिति के बारे में बताते हैं, तो वह वापस लौटने के लिए बोलते हैं, लेकिन यहां विमान सेवा भी बंद है। ऐसे में चाहकर भी वापस नहीं लौट पा रहे हैं। हालांकि यहां की सरकार भारतीयों की हर संभव मदद कर रही है।
वापस आने के लिए परिजन बना रहे दबाव
दिलीप अकबरपुर के गांव भरपुरऊवां के रहने वाले हैं। वह इस्राइल में नेतान्या शहर में फर्नीचर का काम करते हैं। दिलीप के अनुसार, 15 जून की रात में आसपास के क्षेत्रों में थोड़ी-थोड़ी देरी पर हुए मिसाइल हमले के बाद कई धमाके हुए। इससे बचने के लिए तुरंत बंकरों में जाना पड़ा। पत्नी से वीडियो काॅलिंग पर बात की तो वह चिंतित हो उठीं। परिवार के लोग बार-बार वापस आने के लिए दबाव बना रहे हैं।
तीन दिन से बंद है काम
अकबरपुर के सुल्तानपुर गांव के सियाराम इस्राइल के पेटाटिकवा शहर में आजमगढ़ जिले के एक व्यक्ति के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि यहां से कुछ दूर केलाती में शटरिंग का काम करते हैं। लगातार मिसाइलें गिरने की वजह से तीन दिन से काम करने नहीं जा पा रहे हैं। सोमवार की रात तीन बार बमबारी हुई थी। रात में मकानों के नीचे बने बंकरों में छिपना पड़ता है। गांव में पिता रामसुंदर, मां समाजी देवी, पत्नी नीलम और एक बेटे का हाल भी बेहाल है।