फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambedkar Nagar News: एक घंटे बाद बना परचा, दो घंटे बाद मिला उपचार

Tue, 30 Sep 2025 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
विज्ञापन
जिला अस्पताल में परचा बनवाने के लिए कतार में खड़े मरीज।
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल का नजारा सोमवार को किसी मेले जैसा दिखा। सुबह से ही मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ओपीडी में चिकित्सकों के कमरों में मरीजों की कतारें लग गईं। खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीज सबसे अधिक आए, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या प्रमुख रही। केवल एक दिन में करीब 1700 मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
विज्ञापन

सुबह आठ बजे काउंटर खुलते ही लोग परचा बनवाने के लिए टूट पड़े। शुरुआती समय में पहुंचे लोगों को जहां कुछ राहत मिली, वहीं देर से आने वालों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। दोपहर तक हालात ऐसे बन गए कि लंबी कतारें धक्का-मुक्की में बदल गईं। भीड़ संभालना कर्मचारियों के लिए चुनौती बना रहा। सुबह 11 बजे के बाद ओपीडी पर दबाव बढ़ गया। चिकित्सकों के कक्ष में मरीजों का रेला थमता नहीं दिखा। कक्ष के बाहर महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग कतारें लगी दिखीं। कई मरीज घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बाद थककर गलियारों में बैठ गए। दवा वितरण केंद्र पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि कतारें बार-बार टूटती रहीं। लोग आपस में उलझते दिखे और कर्मचारियों को बार-बार व्यवस्था संभालनी पड़ी। कुछ मरीजों का कहना था कि एक घंटे बाद परचा बन पाया वहीं, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने में दो घंटे से अधिक वक्त लग गया।
अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए भी रही जद्दोजहद
सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में जहां परचा व दवा पाने लिए भीड़ का सामना करना पड़ा। वहीं एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों व उनके तीमारदारों की भीड़ रही। लोग जांच की बारी का इंतजार करते-करते घंटों खड़े रहे। तकनीशियन और स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव पूरी तरह नजर आया। भीड़ के बीच कई मरीजों ने समुचित रूप से उपचार न मिलने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि घंटों इंतजार के बाद किसी तरह डॉक्टर को दिखा पाए। अब अब जांच के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


बाहर से लिखी गई आंख की दवा


जलालपुर के भियांव निवासी मिथिलेश कुमार ने बताया कि वह माता की आंख की जांच कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। लंबा इंतजार करने के बाद डॉक्टर ने देखा तो परचे पर एक दवा बाहर से लिख दी। सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद बाहर से दवा लेना मरीजों के लिए परेशानी खड़ी करता है।



अस्पताल से नहीं मिली खांसी की दवा

बसखारी के बरियावन निवासी त्रिभुवन ने बताया कि तबीयत खराब होने पर वह अस्पताल पहुंचे थे। खांसी की शिकायत बताई, लेकिन दवा वितरण केंद्र से आवश्यक दवा उपलब्ध नहीं हो सकी। डॉक्टर ने परचे पर बाहर से खांसी की दवा लिख दी।

एक घंटे की मशक्कत के बाद मिला परचा



अकबरपुर के निबियहवा पोखरा निवासी इंद्रसेन मौर्य ने बताया कि वह पैर दर्द के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे। सुबह से लाइन में लगने के बावजूद परचा बनवाने में करीब एक घंटा लग गया।



सोमवार को सामान्य दिनों की तुलना में भीड़ अधिक रहती है। मरीजों को बेहतर सेवाएं मिलें, इसके लिए अस्पताल में उचित प्रबंध किए गए हैं। हालांकि, बढ़ती भीड़ के कारण जांच और इलाज के लिए मरीजों को थोड़ा ज्यादा वक्त देना पड़ रहा है। अस्पताल में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कोई डॉक्टर अस्पताल में मौजूद दवाओं की अनदेखी कर बाहरी दवाएं लिखता है, तो जांच के बाद संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन





- डॉ. पीएन यादव, सीएमएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें